कारोबारी अमित अग्रवाल ने सेंट्रल एजेंसियों की जांच रोकने की साजिश रची थी , ईडी ने दी कोर्ट को जानकारी

रांची। ईडी द्वारा गिरफ्तार कोलकाता के चर्चित कारोबारी अमित अग्रवाल ने झारखंड में मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध खनन मामलों की जांच में लगी सेंट्रल एजेंसियों की जांच को प्रभावित करने की साजिश रची थी. इसी साजिश के तहत झारखंड हाई कोर्ट के अधिवक्ता राजीव कुमार को भी अमित अग्रवाल ने कोलकाता में ट्रैप कराया था.

सोनू अग्रवाल के जरिये ट्रैप किया गया था राजीव कुमार कोःसूत्रों सेजानकारी मिली है कि सीबीआई और ईडी से शेल कंपनियों की जांच कराने की मांग से जुड़ी याचिका 4290/21 को प्रभावित करने और जांच रोकने की साजिश अमित अग्रवाल ने रची थी. इसके लिए सोनू अग्रवाल की मदद ली गई थी. ईडी ने रांची के पीएमएलए कोर्ट को इस संबंध में जानकारी दी है, जिसमें अमित अग्रवाल द्वारा रची गई साजिश की जानकारी दी गई है. साथ ही ईडी ने कोर्ट को यह भी बताया है कि अमित अग्रवाल ने कोलकाता पुलिस में अपने संबंधों का इस्तेमाल कर वकील राजीव कुमार के खिलाफ वैसी जगह एफआईआर दर्ज कराई, जहां न तो उसका आवास है न दफ्तर.

गौरतलब है की मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध खनन की जांच सीबीआई और ईडी से कराने से जुड़ी याचिका झारखंड हाईकोर्ट में दायर की गई है. याचिकाकर्ता के वकील राजीव कुमार हैं. ईडी के अनुसार अमित अग्रवाल ने ही अपने एक परिचित सोनू अग्रवाल से राजीव कुमार को ट्रैप कराया. सोनू अग्रवाल अधिवक्ता राजीव कुमार का पूर्व परिचित था. सोनू अग्रवाल को आगे कर और कोलकाता पुलिस में अपने प्रभाव इस्तेमाल कर अमित अग्रवाल ने वकील राजीव कुमार को 50 लाख रुपये के साथ कोलकाता में गिरफ्तार करा दिया.

कैसे रची साजिश

ईडी ने कोर्ट में जानकारी दी है कि अमित अग्रवाल ने सोनू अग्रवाल के जरिये राजीव कुमार से संपर्क साधा, जबकि उसने कोलकाता में पुलिस के पास फर्जी शिकायत की कि राजीव कुमार ने याचिका खत्म करने के लिए उससे संपर्क किया. बदले में एक करोड़ घूस मांगी. अमित अग्रवाल ने कोलकाता पुलिस को दी शिकायत में बताया है कि सरकारी पदाधिकारी, केंद्रीय एजेंसियों के पदाधिकारी, जज समेत अन्य लोगों को इस केस में मैनेज करने की बात कहकर राजीव कुमार ने दस करोड़ मांगे हैं. लेकिन ईडी ने कोर्ट को बताया कि अबतक किसी सरकारी पदाधिकारी, जज या एजेंसी के पदाधिकारी ने न तो राजीव कुमार से न ही अमित अग्रवाल से संपर्क किया है. ईडी ने बताया है कि राजीव कुमार ने अमित अग्रवाल से संपर्क नहीं किया था, बल्कि जांच रोकने के मास्टरमाइंड अमित अग्रवाल ने खुद ही राजीव कुमार को प्रलोभन दिया था.

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