बदहाल पड़ा ओलंपिक खिलाड़ी का गांव,जमीन पर बैठकर पढ़ाई करते हैं बच्चे

सिमडेगा। जिस गांव से अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी आते हों तो वहां का हाल भी अच्छा ही होगा, ऐसा माना जाता है लेकिन तस्वीरें बिल्कुल इसके उलट है. आज भी ओलंपिक खिलाड़ी का गांव बदहाल है, यहां शिक्षा की बदहाल स्थिति ऐसी कि बिना भवन के बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ाई करते हैं. ये कोई और जगह नहीं बल्कि बड़की छापर गांव (bad condition of barki chhapar village) है, जो ओलंपिक खिलाड़ी सलीमा टेटे का पैतृक गांव है.

सिमडेगा में शिक्षा की बदहाल स्थिति। शिक्षा जो एक बच्चे का वर्तमान ही नहीं भविष्य भी निर्धारित करता है. जिससे परिवार, समाज, राज्य और देश को समृद्धि और खुशहाली के रास्ते पर ले जाता है. लेकिन सिमडेगा में नौनिहालों को जमीन पर बैठकर शिक्षा ग्रहण करता देख बदहाल शिक्षा व्यवस्था की स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है. लाखों रुपये का भवन बनने के बावजूद ये बच्चे जमीन पर बैठकर शिक्षा ले रहे हैं.

हॉकी के कारण विश्व में विख्यात सिमडेगा जिला में बच्चे जमीन पर बैठकर शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं. जिला का ये वही बरकी छापर गांव , जहां से निकलकर सलीमा टेटे ने देश ही नहीं विश्व में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है. लेकिन आज उसके गांव के बच्चों को पढ़ने के लिए एक अदद भवन तक नसीब नहीं । इसके पीछ की वजह यह है कि जर्जर स्कूल भवन, छत कई जगह से टूटे हुए हैं. कोई हादसा ना हो जाए इसलिए बच्चों को बरामदे में पढ़ाया जा रहा है.

भवन निर्माण में गुणवत्ता की कमीः हालांकि पास ही नए विद्यालय भवन का निर्माण कराया गया है, पर उसमें भी कक्षाएं शुरू नहीं की गई हैं. इस नये भवन की स्थिति देखकर तो यही लगता है कि संवेदक और काम कराने वाले इंजीनियर ने भवन की गुणवत्ता पर कम और पैसों की बंदरबांट पर विशेष ध्यान दिया है. शायद इसी कारण पूरे छत का पानी कमरे के बीचोंबीच छत पर जमा होकर टपकता रहता है. बारिश के दिनों में कक्षाएं तालाब में तब्दील हो जाते हैं. यहां तक की वर्षों बीतने के बावजूद इस भवन को अब तक पेंट नहीं किया गया है. लाखों खर्च कर विद्यालय भवन का निर्माण तो कराया गया पर अब तक उसमें कक्षाएं शुरू नहीं की गई हैं.

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