झारखंड में लगा राहुल गांधी के भारत जोड़ो यात्रा पर ग्रहण, नहीं दिख रहा कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह

रांची। मिशन 2024 को लेकर कांग्रेस पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी जमीन मजबूत करने में जुटी हुई है. कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा को इसी की कड़ी माना जा रहा है. भले ही राहुल गांधी राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की खोयी जमीन को वापस लाने की जद्दोजहद में लगे हुए हैं लेकिन झारखंड में उनकी भारत जोड़ो यात्रा पर मानो ग्रहण लग गया हो. झारखंड में तामझाम के साथ खूंटी के उलिहातू से शुरू हुई कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा टांय-टांय फिस्‍स हो गई है. यहां सीधे-सीधे राहुल गांधी की पदयात्रा की प्रासंगिकता पर सवाल उठ रहे हैं. जबकि कांग्रेसियों का दावा था कि दिसंबर तक लगातार पदयात्रा की जाएगी और पूर्व अध्‍यक्ष राहुल गांधी का संदेश गांव-देहात, मंडल, मोहल्‍ला और ग्राम पंचायतों तक पहुंचाया जाएगा. वर्तमान हालत ऐसी है कि कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा राज्‍य में महज औपचारिकता से आगे नहीं बढ़ सकी. बताया गया कि राहुल गांधी की बहुप्रचारित भारत जोड़ो यात्रा के रूट में झारखंड नहीं है, ऐसे में आलाकमान के निर्देश पर झारखंड में पदयात्रा का आगाज धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की जन्मभूमि उलिहातू, खूंटी से पूरे तामझाम के साथ किया गया. राज्य में पदयात्रा कार्यक्रम के संयोजक पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय बनाए गए. हालांकि, पदयात्रा की शुरुआत के मौके पर प्रदेश स्तर के वरिष्‍ठ नेताओं का जुटान हुआ और दावा किया गया कि पदयात्रा दिसंबर माह तक चलेगी. लेकिन एक दिन के औपचारिक कार्यक्रम के बाद भारत जोड़ो यात्रा एक कदम भी आगे नहीं बढ़ पाई. कांग्रेस प्रवक्ता राकेश सिन्हा ने बताया कि त्योहार के कारण पदयात्रा फिलहाल रोक दी गई है. झारखंड के सभी 81 विधानसभा क्षेत्र में पदयात्रा का आयोजन होगा.

नहीं ले रहे कांग्रेस के मंत्री- विधायक भी रूचि

कांग्रेस पार्टी ने पदयात्रा कार्यक्रम का आगाज तो कर दिया लेकिन पार्टी के मंत्री और विधायक इसमें रूचि नहीं ले रहे हैं. संशाधन की कमी भी एक बड़ा कारण बताया जा रहा है. कांग्रेस पार्टी की बरामदा कमिटी में पदयात्रा को लेकर कई तरह की चर्चाएँ हो रही है. कहा जा रहा है कि संशाधन जुटाने का जिम्मा पार्टी ने हेमंत सरकार में शामिल मंत्रियों को दिया था लेकिन मंत्रियों की रूचि इसमें नहीं दिख रही है. मंत्रियों की अनदेखी के कारण भी झारखंड में पदयात्रा पर ग्रहण लगा है. बरामदा कमिटी में इस बात की भी चर्चा थी कि विधायकों को भी जितनी प्राथमिकता इस कार्यक्रम को देना चाहिए था, वह देखने को नहीं मिल रहा है. बगैर संसाधन के बड़ा कार्यक्रम का लगातारआयोजन करना मुश्किल है. अगर इस स्तर पर मदद नहीं होगी तो आगे आयोजन होने से रहा. जिला और प्रखंड कांग्रेस कमेटियों को आयोजन की तैयारी करने का निर्देश दिया गया है, लेकिन वे भी ज्यादा उत्साहित नहीं दिखते.

दूसरा चरण जनवरी से शुरू करने का दावा

पदयात्रा की जब शुरूआत हुई तो प्रदेश स्तर के नेताओं का जुटान हुआ. दावा किया गया था कि पदयात्रा दिसंबर माह तक चलेगी और हरेक प्रखंड में इसका आयोजन होगा. यात्रा का रूट तय किया जाएगा. इसके लिए वरीय नेताओं की बैठक भी हुई. हालांकि एक दिन के औपचारिक कार्यक्रम के बाद यह आगे नहीं बढ़ पाया. इस संबंध में प्रवक्ता राकेश सिन्हा का कहना है कि त्योहार के कारण पदयात्रा फिलहाल रोकी गई है. इसका पहला चरण दिसंबर माह तक चलेगा. जनवरी में इसका दूसरा चरण आरंभ होगा. इसी दौरान सभी 81 विधानसभा क्षेत्र में भी पदयात्राओं का आयोजन करने की तैयारी है.

जिलों में संगठनिक बदलाव की तैयारी से भी ऊहापोह

जानकारी के अनुसार जिला स्तर पर कांग्रेस पार्टी में अगले महीने से बदलाव शुरू हो जाएगा. जिला अध्यक्षों के नाम की घोषणा होगी. इसके लिए सारी औपचारिकताएं पूरी की जा चुकी है. संभावना है कि अधिकांश जिलाध्यक्ष बदल दिए जाएंगे. यही वजह है कि उनके स्तर से फिलहाल सांगठनिक कार्यक्रम को लेकर ज्यादा उत्साह नहीं है. प्रदेश कांग्रेस प्रभारी उन सभी लोगों से मिलकर साक्षात्कार कर चुके हैं, जो विभिन्न जिलों में जिलाध्यक्ष पद के दावेदार हैं.

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