छठ महापर्व: आज खरना , खीर प्रसाद के साथ शुरू होगा 36 घंटे का व्रत, जाने नियम और परंपरा

रांची। छठ महापर्व 28 अक्टूबर से शुरू है. इन दिन व्रतियों ने नहाय खाय के साथ भगवान सूर्य की पूजा अर्चना की. वहीं, आज यानी 29 अक्टूबर खरना का दिन है. जहां छठव्रती रात में खीर का प्रसाद ग्रहण करने के बाद छठी मैया का 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू करतीं है. पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को खरना मनाया जाता है. आज खरना सुबह 08 बजकर 13 मिनट से शुरू हो रही है. इस तिथि की समाप्ति कल 30 अक्टूबर को सुबह 05 बजकर 49 मिनट पर होगी. खरना से मन की सफाई यानि पवित्रता होती है. छठ पूजा साफ-सफाई के साथ ब्रह्मचर्य के कठिन नियमों से जुड़ा हुआ है.

व्रती के मन की शुद्धता के लिये खरना

खरना पूजा विशेषकर व्रती के मन की शुद्धता के लिए होता है. इस दिन व्रती स्वयं को मानसिक तौर पर 36 घंटे के कठिन निर्जला व्रत के लिए तैयार करता है. तन और मन की शुद्धता के बाद छठ पूजा का व्रत प्रारंभ होता है. खरना के दिन ही छठ पूजा का प्रसाद बनाया जाता है, इसमें भी शुद्धता का विशेष ध्यान रखते हैं. छठ का प्रसाद मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी की मदद से बनाया जाता है. प्रसाद में विशेष तौर पर ठेकुआ बनाते हैं.

कल अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य
आज खरना के साथ शुरू होने वाला छठ उपावसना में, कल यानी 30 अक्टूबर को व्रतियां अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगी. इस दिन बांस के सूप में दीप धूप फल ठेकुआ के साथ अर्घ्य दिया जाता है. वहीं, 31 अक्टूबर को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दिया जायेगा. जिसके साथ ही महापर्व छठ का समापन होगा. जानकारी हो कि उदीयमान सूर्य के अर्घ्य के साथ ही व्रतियां पारन करतीं है.

खरना पूजन विधि

छठ पूजा के दूसरे दिन प्रातः स्नान के बाद व्रती व्रत और पूजा का संकल्प करता है. फिर इस दिन निर्जला व्रत रखा जाता है. दिन में छठ पूजा का प्रसाद बनाया जाता है. रात के समय में चावल और गुड़ से खीर बनाते हैं, जिसे रसियाव कहा जाता है. इसके अलावा पूड़ी भी बनाई जाती है. प्रसाद बन जाने के बाद व्रती पूजा करते हैं और वे सूर्य भगवान को रसियाव, पूड़ी और मिठाई का भोग लगाते हैं.

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