रामगढ़ ( दुलमी ) । शुक्रवार को कर्मा का पर्व मनाया जाएगा। शुक्रवार को पर्व के अनुष्ठान को लेकर बहनों ने नहाय-खाय किया। शनिवार को बहनें अपने भाईयों की सलामती के लिए उपवास रहकर व्रत का अनुष्ठान करेंगी। बहनें पूजा के दिन उपवास रहकर भाई की लम्बी उम्र की कामना करती हंै। घर के आंगन में करम का पौधा रखकर , मिट्टी से शंकर —पार्वती की प्रतिमा को प्रकृति के उपहारों से सजाते हैं। कर्मा पूजा करने के बारे में ऐसे तो कई कहानी है ।प्रखंड अध्यक्ष अनिल इगनेश ने बताया कि कर्मा और धर्मा नामक दो भाई बहन बहुत ही प्रेम से बचपन गुजार रहे थे । कर्मा की शादी हो गई। उसकी पत्नी दूसरे को दुख देने वाली थी । एक दिन उसकी पत्नी घर के बाहर खाना पका रही थी और माड़ को धरती पर गिरा रही थी तब कर्मा ने अपनी पत्नी को कहा कि धरती मां के सीने पर गर्म माड़ मत उझलो लेकिन वह नहीं मानी । यह सब देखकर कर्मा घर से चला गया। उसके जाते गांव में तरह तरह की बीमारी व अकाल होने लगी। धर्मा जब घर आईं तो उसने अपने भाई को नही पाकर उसे ढूंढने निकल गई। रास्ते मे पेड़ मिला वह भी सुख गया । पेड़ ने कहा जल्दी कर्मा को ढूंढ लाओ । फिर नदी से पूछा नदी भी सुख गई । नदी ने कहा जल्दी कर्मा को बुलाओ । इसी तरह ढूंढते रेगिस्तान में चला गया । वहां कर्मा गर्मी से जल रहा था । धर्मा ने कहा चल मेरे भाई सब तुम्हारे बिना मर जायेंगे फिर कर्मा घर वापस आया और गांव में खुशहाली व नदी में पानी लौट आई। तब से लेकर हमलोग कर्मा त्योहार धूम धाम से मनाते आ रहे है।