साहिबगंज। साहिबगंज महाविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई 4 के द्वारा अंतराष्ट्रीय ओजोन दिवस के अवसर पर एक दिवसीय विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम पदाधिकारी व भूवैज्ञानिक तथा पर्यावरणविद डॉ. रणजीत कुमार सिंह ने बताया कि आज हमें पर्यावरण संरक्षण के प्रति सजग रहना होगा, तभी ओजोन परत में हो रही दिनोंदिन ह्रास को कम किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि,
हमारे जीवन के लिए ओजोन परत बहुत ही महत्वपूर्ण है, जो सूर्य की खतरनाक पराबैंगनी (अल्ट्रा वायलेट) किरणों से हमारी रक्षा करती है। यदि ओजोन परत को नुकसान पहुंचता है तो मनुष्य में त्वचा से जुड़ी तमाम बीमारियां हो सकती हैं।
ओजोन परत के बिना हम जिंदा नहीं रह सकते, क्योंकि इन किरणों के कारण कैंसर, फसलों को नुकसान और समुद्री जीवों को खतरा पैदा हो सकता है और ओजोन परत इन्हीं पराबैंगनी किरणों से हमारी रक्षा करती है।
वही साहिबगंज महाविद्यालय के एनएसएस स्वयंसेवक अमन कुमार होली ने बताया कि वर्तमान दौर में आधुनिकता एवं विकास की बढ़ती होड़ के कारण पर्यावरण की लगातार अनदेखी की जा रही है, इसका परिणाम यह है कि आज ग्लोबल वार्मिंग और ओजोन परत में छिद्र होते जा रहे हैं , निश्चित तौर पर या मानवता के लिए खतरे का विषय है। इसलिए हमें सजग होने की आवश्यकता है, अधिक से अधिक पेड़ लगाकर एवं उसका संरक्षण करके पर्यावरण की हरियाली को बरकरार रखा जा सकता है।
मौके पर महाविद्यालय के एनएसएस वॉलिंटियर खुशीलाल पंडित ने बताया कि हमें आज ओजोन परत के संरक्षण की जरूरत है, क्योंकि आज ओजोन परत में हो रहे निरंतर चरण के कारण सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणें सीधे पृथ्वी पर आती है और मनुष्यों एवं पृथ्वी पर रह रहे जीव जंतुओं के शरीर में प्रवेश करती है। आज वाहनों के अत्यधिक प्रयोग से डीजल तथा पेट्रोल के अपूर्ण दहन के कारण क्लोरोफ्लोरोकार्बन अत्यधिक मात्रा में उत्पन्न हो रही है, जो ओजोन परत क्षरण का सबसे बड़ा कारण है।
इस अवसर पर दर्जनों की संख्या में एनएसएस वॉलिंटियर एवं महाविद्यालय के विभिन्न विभाग के छात्र – छात्राएं उपस्थित रहे, जिनमें विराज कुमार, राहुल कुमार, अतुल कुमार, मनीषा राय, साक्षी कुमारी आदि ने सक्रिय भूमिका अदा की।
इसके पूर्व डॉ. रणजीत कुमार सिंह ने विस्तार से थीम पर चर्चा करते हुए कहा कि वर्ल्ड ओजोन डे 2021 की थीम की बात करें तो इस साल की थीम है, “मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल – हमें हमारे भोजन और टीकों को ठंडा रखना” है। इस वर्ष के विश्व ओजोन दिवस पर प्रकाश डाला गया है, मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल बहुत कुछ करता है – जैसे कि जलवायु परिवर्तन को धीमा करना और ठंडे क्षेत्र में ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देने में मदद करना, जो खाद्य सुरक्षा में योगदान देता है।