पाकुड़ ( आमड़ापाड़ा )। सड़क निर्माण के लिए अधिग्रहित की गई मकान की उचित राशि 6 वर्ष पूर्व से पाने को लेकर पीड़ित गणेश मंडल और उनके परिवार आज तक दर- दर भटकने को विवश है। पीड़ित परिवार के लिए सिर ढकने के लिए आशियाना चला गया साथ ही व्यापार की जगह भी उजाड़ दी गयी।
फिलहाल वर्तमान में बचे दो कमरे का मकान भी बने सड़क से 5 फीट नीचे हो गई है। बारिश का सारा पानी सड़कों से उतर कर घर में प्रवेश कर रही है।

मामला अमड़ापाड़ा प्रखंड क्षेत्र के जराकी पंचायत के छोटा पहाड़पुर गाँव का है।
उक्त गांव के निवासी गणेश मंडल का मकान 2015 में गोविंदपुर साहिबगंज राजपथ हेतु सड़क निर्माण के लिए मकान और जमीन का अधिग्रहण किया गया था। भुक्तभोगी गणेश मंडल का 2014 में घर का बाउंड्री वॉल, और खपरैल घर का अधिग्रहण किया गया था। इस बाबत एक लाख 25 हजार 941 रूपए का भुगतान किया गया था। पुनः 2015 में तीन कमरे, रसोई घर शौचालय सहित 5 कट्ठा जमीन को चिन्हित किया गया था। जिसके एवज में गणेश मंडल को चार लाख 61 हजार रूपए का ही अबतक भुगतान किया गया है। जबकि गणेश के द्वारा भुगतान मिलने के पूर्व कई बार भूअर्जन पदाधिकारी को आवेदन देकर मकान, जमीन के बाबत 12 लाख रुपए की मुआवजा राशि का दावा पेश किया गया है। 6 साल बीत गए हैं। लेकिन अब तक भुक्तभोगी गणेश मंडल को बकाया भुगतान नहीं किया गया है। गणेश मंडल को मुआवजा के लिए बार-बार शासन – प्रशासन की कार्यालय का चक्कर लगते लगते थक चुँके है।प्रारंभ से ही कागजात से कानूनी लड़ाई लड़ते आ रही है। लेकिन कोई हल न निकलता देख वर्ष 2015 में मुख्यमंत्री को पत्र भी लिखा था। उप सचिव सह प्रभारी,पदाधिकारी जन शिकायत कोषांग झारखंड सरकार, रांची द्वारा अधिग्रहित मकान का मुआवजा भुगतान के संबंध में 29 अक्टूबर 2015 को आयुक्त संथाल परगना प्रमंडल को आदेश दिया गया था। इस बीच कई बार आवेदन देने पर आयुक्त कार्यालय से 5 वर्ष के बाद यानी 20 अक्टूबर 2020 को उपायुक्त पाकुड़ को आवश्यक कार्रवाई हेतु निर्देश दिया गया था। लेकिन इसके बाबत भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। आपको बता दें अब तक सैकड़ों बार गणेश दफ्तरों का चक्कर लगा चुके हैं। लेकिन पुनः 7 जुलाई 2021 को उपायुक्त पाकुड़ को आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई है। आवेदन देने के साथ-साथ गणेश मंडल ने रुचि भी जगाई है की नए उपायुक्त महोदय से आशा है।
हमारे साथ जरूर न्याय करेगी ।

आखिरकार क्यों इतना परेशान है भुक्तभोगी गणेश मंडल।
गणेश मंडल ने बताया कि जमाबंदी संख्या 13, दाग संख्या 372 में हमारा मकान था। जहां मेरा घर और मेरा स्थान व्यापार दोनों चलता था। लेकिन अधिग्रहण के बाद जीवन यापन का एकमात्र जरिया अनाज क्रय केंद्र बंद हो गया। जिस वजह से इसके लिए मेरी पत्नी को जेल भी जाना पड़ा। सरकार जब पैसा पाती है तो गरीबों को जेल भेज देती है ।और मेरी मुआवजा राशि के बाबत भी कोई पहल नहीं की गई है। सरकार ने जहां भूमि अधिग्रहण नियमावली तो बनाया है। लेकिन सरकारी तंत्र के उदासीन रवैया के कारण नियमों का अनुपालन नहीं हो रहा है। जहां प्रशासन में शामिल अधिकारियों द्वारा लोगों के साथ छलावा किया जा रहा है। हम लोगों ने कभी भी विकास कार्य अवरुद्ध नहीं किया है। बल्कि विकास कार्य पूरा कराने में सरकार का हर संभव मदद किया है।काम पूरा हो जाने के बाद प्रशासन और सरकार लोगों के अधिकार के साथ खिलवाड़ कर रहा है।अखिर शासन -प्रशासन पीड़ित गरीब गणेश मंडल के साथ सोतेला व्यवहार क्यों कर रही है।इनको न्याय कब मिलेगी।

बड़ा सवाल सरकार गरीबों के जमीन तो मन चाहा समय पर अधिग्रहण कर लेती है।लेकिन उचित मुआवजे के लिए पीड़ितों को क्यों कार्यालय की चक्कर लगयी जाती हैं।समय पर मुआवजा क्यों नहीं देती है।ऐसे मे पीड़ित गरीबों किस पर भारोसा करेे।न्याय कब होगी।यही है सरकार की कानून व्यवस्था।उनकी अधिकार को छीनकर उसके साथ अन्याय किया जाए।अब देखना होगा कब तक विभाग के पदाधिकारी पीड़ित गणेश मंडल के साथ न्याय करेंगे।