लोहरदगा lभारतीय जनता पार्टी जिला लोहरदगा अंतर्गत भंडरा प्रखंड के चट्टी ग्राम 320 बूथ नंबर पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जन्म जयंती मनाई गई कार्यक्रम की अध्यक्षता पूना उरांव पूर्व मुखिया सह बूथ अध्यक्ष ने की। इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से भारतीय जनता पार्टी झारखंड प्रदेश संगठन महामंत्री श्री धर्मपाल सिंह जी, जिला अध्यक्ष मनीर उरांव, संयोजक सूरजमोहन साहू, धनंजय तिवारी पूर्व सांस्कृतिक प्रकोष्ठ संयोजक , अजातशत्रु प्रदेश मंत्री भाजयुमो, प्रशांत शाहदेव किसान मोर्चा प्रदेश सदस्य उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन महापुरुष के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पण के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की गई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रुप में उपस्थित संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह जी ने कहा कि

एकात्म मानववाद को केंद्र में रखकर हो सकता है देश का सर्वांगीण : विकास धर्मपाल सिंह

पंडित दीनदयाल उपाध्याय एक दार्शनिक समाजशास्त्री अर्थशास्त्री एवं राजनीतिज्ञ थे। उनके द्वारा प्रस्तुत दर्शन को एकात्म मानववाद कहा जाता है जिनका उद्देश्य एक ऐसा स्वदेशी सामाजिक आर्थिक मॉडल प्रस्तुत करना था जिसमें विकास के केंद्र में मानव हो और संपूर्ण राष्ट्र।
उपाध्याय जी ने पूंजीवादी व्यक्ति एवं मार्क्सवादी समाजवाद दोनों का विरोध किया था ।पूंजीवाद एवं समाजवाद के मध्य एक ऐसी राह के पक्षधर थे जिसमें दोनों प्रणालियों के गुण तो मौजूद हों। उनके अतिरेक एवं अलगाव जैसे अवगुण ना हो। पूंजीवादी और समाजवादी विचारधाराएं केवल मानवशरीर एवं मन की आवश्यकताओं को पूरा करती हैं। इसीलिए मानव के संपूर्ण विकास के लिए इनके साथ साथ आत्मिक विकास की भी आवश्यकता है साथ ही उन्होंने एक वर्ग ही जाति ही एवं संघर्ष मुक्त समाज व्यवस्था की कल्पना की थी।
भारतीय संस्कृति में मोक्ष को परम पुरुषार्थ माना गया है तो भी अकेले उसके लिए प्रयत्न करने से मनुष्य का कल्याण नहीं होता वास्तव में अन्य पुरुषार्थ की अवहेलना करने वाला कभी मोक्ष के अधिकारी नहीं हो सकता।

एकात्म मानववाद का उद्देश्य व्यक्ति एवं समाज की आवश्यकता को संतुलित करते हुए प्रत्येक मानव को गरिमा पूर्ण जीवन सुनिश्चित करना है यह प्राकृतिक संसाधनों के संधारणीय उपभोग का समर्थन करता है। जिससे कि उन संसाधनों की पुनः पूर्ति की जा सके।
एकात्म मानववाद न केवल राजनीतिक बल्कि आर्थिक एवं सामाजिक लोकतंत्र एवं स्वतंत्रता को बढ़ाता है यह सिद्धांत विविधता को प्रोत्साहन देता है पता भारत जैसे विविधता पूर्ण देश के लिए सर्वाधिक उपयुक्त है। एकात्म मानववाद का उद्देश्य प्रत्येक मानव को गरिमा पूर्ण जीवन प्रदान करना है एवं अंत्योदय अर्थात समाज के निचले स्तर पर स्थित व्यक्ति के जीवन में सुधार करना है। दो धोती, दो कुर्ते और दो वक्त की भोजन ही मेरी संपूर्ण आवश्यकता है। जिससे मुझे अधिक क्या चाहिए। इस वाक्य में दीनदयाल जी के एकात्म मानववाद और अंत्योदय मूल मंत्र और दर्शन को आसानी से समझा जा सकता।। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अंतोदय शब्द कि अपनी गरीबोन्मुखी योजनाओं से उसे साकार करने की दिशा में एक नहीं अनेक साहसिक निर्णय लिए हैं केंद्र सरकार कई जनहित की योजनाएं चला रही है मोदी सरकार में दीनदयाल जी के अंतोदय का सपना धीरे-धीरे साकार हो रहा है कहना गलत नहीं होगा कि दीनदयाल उपाध्याय जी का एकात्म मानववाद और अंत्योदय का दर्शन भारत जैसे कल्याणकारी राज्य में सदा प्रासंगिक रहेगा।
कार्यक्रम का मंचसंचालन महामंत्री राजकुमार वर्मा एवं धन्यवाद ज्ञापन जिला उपाध्यक्ष सूरजमोहन साहू ने की।

कार्यक्रम में उपस्थित बालकृष्णा सिंह, छेदी राम, केदार प्रसाद गुप्ता, दामोदर तिवारी, रमेश महतो, पशुपति नाथ पारस, विश्वजीत शाहदेव, मनीष शिखर, सजल कुमार, रविकांत तिवारी, बाल्मीकि कुमार, जगदेव गोप, बदरी प्रसाद, रामधिरीत, राजदीप तिवारी, निलेश बैठा, सुशील उरांव, विनोद उरांव, विकास गोप, विरबल उरांव, छोटया उरांव सहीत अन्य उपस्थित हैं