लोहरदगा । आदिवासी बहुल आकाशी गांव की सूरजमनी उरांव कृषि पर निर्भर है। सुरजमनी के परिवार को सिंचाई के लिए पानी की किल्लत से कृषि कार्य में परेशानी हो रही थी। कृषि कार्य सही से नहीं होने से घर चलाना मुश्किल हो गया था। 10वीं तक की पढ़ाई करनेवाली सुरजमनी ने इस मुश्किल के समय में जेएसएलपीएस से जुड़ने की ठानी और जेएसएलपीएस द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त कर फूलों की खेती योजना से जुड़ीं। उनके इस निर्णय लेने के बाद उनके पति बन्दे उरांव ने भी उनका पूरा सहयोग दिया और साथ ही उद्यान विभाग की मदद से गेंदा फूल का बीचड़ा प्राप्त करके 60 डिसमिल जमीन पर गेंदा फूल की खेती की।

समाज में बढ़ा सूरजमनी का सम्मान

सूरजमनी के इस निर्णय ने सूरजमनी की आर्थिक दशा बदल दी और एक समय बेरोजगार रहीं सूरजमुनी आज प्रति कठ्ठा जमीन फूलों की खेती से 4-5 हजार रुपये की आय करती हैं। इससे उनका परिवार खुशहाली से चल रहा है। आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के बाद सूरजमनी का सम्मान समाज में बढ़ा है। एक समय में सूरजमनी शादी कर आकाशी पहुंची थी, तब उसके ससुराल की आर्थिक हालात खराब था। पूरे परिवार के समक्ष आर्थिक संकट था । वह अपनी इस आर्थिक हालात पर ना ही अपने माता पिता, ना ही अपने पति का विरोध किया, बल्कि अपने जीवन जीने के लिए एक नये रास्ते का चयन किया, फूलों की खेती शुरू की। अब उसके यहां से कई गांवों के व्यापारी एवं ग्रामीण फूल की खरीदारी करने आते हैं। इससे उनका परिवार सुखद जीवन व्यतीत कर रहा है। इनके खेतों का फूल लोहरदगा, भण्डरा, कैरो, नगजुआ समेत कई जगह के खुदरा बिक्रेता पहुंचते है।

सूरजमनी की महिलाओं से अपील

सूरजमनी कहती हैं कि फूल की खेती पर प्रति कट्ठा दो हजार का खर्च होता है। इसके बदले 4-5 हजार रूपये का मुनाफा होता है। सूरजमनी ने क्षेत्र की महिलाओं से अपील की कि भविष्य में जीवन का नाश करने वाले शराब का कारोबार कभी नहीं करना चाहिए। मेहनत व लगन से काम करने से सफलता अवश्य मिलती है। सरकार द्वारा कई कल्याणकारी योजनाएं संचालित हैं, स्वरोजगार से जुड़ने का अवसर मिलता है। मैंने उद्यान विभाग की इस योजना का लाभ उठाया और अब आर्थिक रूप से स्वावलंबी हूं।