जमशेदपुर । पिछले कुछ समय से जुबली पार्क और उसकी सड़क खोलने को लेकर लोगों का भारी दबाव था. खासकर जब जुस्को ने सड़क खोदकर घास बिछानी शुरू की थी, तब लोगों को लगा कि रास्ता हमेशा के लिए बंद हो जाएगा. इसके बाद इसको खोलने के लिए आवाज उठी. सरयू राय ने भी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया और उसके बाद जेएमएम और कांग्रेस जैसे दलों ने भी जुबली पार्क खोलने के लिए धरना–प्रदर्शन किया. हालांकि भाजपा ने इस मुद्दे पर टाटा स्टील का साथ दिया और पूर्व सीएम रघुवर दास तथा नगर अध्यक्ष गुंजन यादव खुलकर पार्क बंद रखने के समर्थन में मुखर रहे. लेकिन उन्हीं के पार्टी के अभय सिंह लगातार पार्क खोलने के लिए आंदोलन का रवैया अपनाए रहे. इनसब के बीच शहर में बढ़ते जाम और रविवार की सुबह-सुबह बागे-जमशेद के पास हादसे ने स्कूटी सवार की मौत ने जुबली पार्क खोलने के लिए प्रशासन और टाटा स्टील को विवश कर दिया.

आखिरकार जुबली पार्क का गेट बंद करने के मामले में अंततः डेढ़ साल के बाद जनता की जीत हुई और जुबली पार्क को खोल दिया गया है. इसको लेकर विधायक सरयू राय से लेकर भाजपा नेता अभय सिंह तक ने आंदोलन किया था. रविवार को सूबे के स्वास्थ्यमंत्री बन्ना गुप्ता की मौजूदगी में जुबली पार्क को खोल दिया गया है. इसको लेकर शनिवार तक जुबली पार्क गेट के पास आंदोलन किया गया था. इसी मामले में नागरिक सुविधा मंच के संयोजक की ओर से बिष्टूपुर थाने में एक अधिकारी के खिलाफ मामला भी दर्ज कराया गया था.

गेट खुलवाने के लिए हुई थी राजनीति : बन्ना
स्वास्थ्यमंत्री बन्ना गुप्ता ने कहा कि जमशेद जी नौसरवान जी टाटा के सपनों का शहर है. उन्होंने शहर के आम लोगों की सुविधा का खयाल रखा, लेकिन वर्तमान में कंपनी के अधिकारी व्यावसायीकरण और अर्थ दोहन के उद्देश्य से काम कर रहे हैं. गेट खुलवाने के लिए बहुत राजनीति हुई. जिस भी पार्टी के लोगों ने जुबिली पार्क को खुलवाने की कोशिश की वह स्वागत योग्य है. लोकतंत्र में सभी को आवाज उठाने का अधिकार है. पार्क व रास्ता पहले की तरह ही खुलेगा. 2 व्हीलर 4 व्हीलर सब पहले की तरह चलेंगे.

सरयू राय का आंदोलन सफल रहा : भाजमो
भाजमो जमशेदपुर महानगर के जिला अध्यक्ष सुबोध श्रीवास्तव ने जुबली पार्क के दोनों गेट खुलने और आवागमन शुरू होने पर जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय का आभार प्रकट किया और इसे जनता की बड़ी जीत करार दिया है. जुबली पार्क गेट को कोरोनाकाल की दुहाई देकर टाटा कंपनी पर दबाव बनाकर साजिश के तहत अनिश्चितकाल तक के लिए पूणतः बंद कर दिया गया था. पार्क भ्रमण के लिए विभिन्न प्रकार के अनावश्यक नियम कानून को लागू कर दिया था . आम जनता की अधिकारों के छीनने का और उनकी आवाज को दबाने का भरपूर प्रयास किया गया था. इतिहास में पहली बार शहर की व्यवस्था में कोई इस तरह का असंवैधानिक बदलाव किया गया था. इसे जमशेदपुर की जनता ने सिरे से नकारा था. इस विषय पर प्रशासन, स्थानीय विधायक सह मंत्री और राज्य के राजनीतिक दल सभी ने मौन धारण कर लिया था. विधायक सरयू राय ने इसपर एतराज जताया था. जनता की शिकायत पर स्वयं पार्क का भ्रमण कर सभी बदलावों की वस्तुस्थिति का जायजा लिया था. विधायक ने कड़े शब्दों में प्रशासन को पार्क प्रवेश के दौरान अनावयशक नियमों को समाप्त करने और तोड़े गए सड़क को अविलंब मरम्मत करने की जोरदार मांग उठाई थी. उन्होंने पार्क के दोनों गेट को खोलने के लिए जिले के डीसी से हस्तक्षेप करने और टाटा कंपनी से वार्ता कर जल्द निर्णय लेने की बात कही थी. जुबली पार्क गेट खोलने और यातायात को शुरु करने की मांग शहर के हर कोने से उठने लगी थी.

छवि सुधारने के लिए मंत्री दबाव में आए : सुबोध श्रीवास्तव
इस पूरी अवधी में सरकार के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता की ओर से पार्क की सड़क को शुरू कराने की रूचि नहीं दिखाई थी. यह एतिहासिक पल है जब जनता के दबाव में राज्य के मंत्री को स्वयं आकर अपनी बड़ी गलती को सुधार करने को विवश होना पड़ा. पार्क को सुनियोजित तरीके से बंद करने वाले ने स्वयं पार्क खुलवाने के लिए आगे आए यह जनता की बड़ी जीत है. मंत्री ने जनता के बीच बिगड़ती छवि को बचाने के लिए जुबली पार्क खोलने पर अपना दबाव वापस ले लिया. ट्रैफिक लोड के मद्देनजर फ्लाई ओवर के निर्माण कराएं जाएं. सड़कों को दुरूस्त किया जाए और सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने का प्रयास हो. भाजमो ने ऐलान किया कि जमशेदपुर की जनता के मूल अधिकारों के साथ छेड़छाड़ नहीं करने दिया जाएगा.

तानाशाही की हार व लोकतंत्र की जीत : अभय
भाजपा नेता अभय सिंह का कहना है कि जुबली पार्क गेट खुलने के मामले में तानाशाही की हार और लोकतंत्र की जीत हुई है. जिला प्रशासन और झारखंड सरकार के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता की उपस्थिति में गेट खोला गया. यह जमशेदपुर की जनता की जीत है. सड़क को बंद करना जुर्म है. 20 अगस्त 2005 के टाटा लीज नवीकरण का उल्लंघन नहीं किया जा सकता. नागरिक सुविधा मंच की ओर से जब दबाव बनाया गया, तब आखिरकार सरकार को झुकना ही पड़ा.