रांची । 16 सितंबर को रांची विवि ने सिंडिकेट की बैठक में निर्णय लेते हुए अनुबंध पर काम कर रहे वैसे 36 कर्मचारियों की सेवा को नियमित कर दिया गया, जिन्होंने 10 साल पूरे कर लिए थे. इन 36 कर्मचारियों में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी थे. इनकी सेवा नियमितीकरण पर रांची विवि प्रशासन ने नियमों की अनदेखी की है. यह आरोप विश्वविद्यालय महाविद्यालय कर्मचारी संघ ने लगाया है.

विश्वविद्यालय महाविद्यालय कर्मचारी संघ के जेनरल सेक्रेटरी पवन जेडिया ने बताया कि विवि ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश और राज्य सरकार के गाइड लाइन का पालन नहीं किया. सुप्रीम कोर्ट ने जिस तिथि को कट ऑफ डेट मानते हुए सेवा नियमित करने का निर्देश दिया था, उसका सीधा उलंघन किया गया है.

सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक सरकार एवं अन्य बनाम उमादेवी एवं अन्य मामले में आदेश देते हुए कहा था कि देश के सभी राज्यों के सभी विवि में वैसे कर्मचारी जिनकी नियुक्तियां अनुबंध पर हुई हैं. पर यह नियुक्ति सृजित पद के विरुद्ध, नियमों का पालन करते हुए विज्ञापन के माध्यम से हुई हो, उन्हें नियमित करना है. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि 20 जून 2019 तक नियमित रूप से सेवा देते हुए 10 साल पूरा कर लिया हो, उन्हें ही नियमित किया जाना है. सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि राज्य सरकार भी अपना गाइडलाइन बनायेंगे. राज्य सरकार ने भी अपना गाइडलाइन जारी किया.

कहां हुई है गड़बड़ी

विश्वविद्यालय महाविद्यालय कर्मचारी संघ के जेनरल सेक्रेटरी पवन जेडिया के मुताबिक जिन 36 कर्मचारियों की सेवा नियमित की गयी है वे राज्य सरकार के गाइडलाइन का पालन नहीं करते हैं. जिन कर्मियों की सेवा नियमित की गयी है उसमें कंप्यूटर ऑपरेटर भी हैं. लेकिन इनकी नियुक्ति सृजित पद के विरुद्ध नहीं हुई है. इसके बाद भी इनकी सेवा नियमित कर दिया गया. यह नियम के खिलाफ है. जब कट ऑफ़ डेट 20.06.2019 निर्धारित किया गया है इसके बाद भी विवि ने अपने हिसाब से इसमें बदलाव कर सेवा नियमित की.

सेलेक्शन कमिटी से होना था निर्णय

विश्वविद्यालय महाविद्यालय कर्मचारी संघ के जेनरल सेक्रेटरी पवन जेडिया ने बताया कि कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए एक चयन समिति बनी थी. पहले संघ के पदाधिकारियों को इस अलग कर दिया गया. इसके बाद आन्दोलन करने के बाद शामिल किया गया. इसके बाद 26 फरवरी को विवि मुख्यालय से पत्र जारी किया गया. जिसमें कहा गया कि सभी कर्मचारियों से आवेदन लिया जायेगा. इसके बाद चयन समिति स्क्रूटनी करेगी. लेकिन फ़रवरी से लेकर आज तक बैठक नहीं हुई. जबकि राज्य सरकार की नियमावली में कहा गया है कि चयन समिति आवेदन मंगाएगी. आवेदन की स्क्रूटनी की जायेगी. इसके बाद छह माह के भीतर नियमितीकरण पर निर्णय लिया जायेगा. जबकि रांची विवि प्रशासन ने ऐसा नहीं किया. विवि के इस रवैये का खामियाजा वैसे 450 कर्मी उठा रहे हैं जो सभी योग्यता पूरी करते हुए 25-25 साल से नौकरी कर रहे हैं. इस विषय में पूछे जाने पर प्रभारी वीसी डॉ कामिनी कुमार ने बताने से इंकार करते हुए बाद में बात करने को कहा.

मिली जानकारी के अनुसार झारखंड यूनिवर्सिटी एक्ट के अनुसार सिंडिकेट केवल विवि पदाधिकारी और शिक्षकों की अस्थायी नियुक्ति पर मुहर लगा सकती है. जबकि सिंडिकेट ने तृतीय और चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों की नियुक्ति पर मुहर लगायी. इसके अतिरिक्त विवि को नामों का चयन कर कैबिनेट के पास अनुमोदन के लिए सूची भेजना था. वहां से अनुमति मिलने के बाद सेवा नियमित किया जाना था. विवि के इसकी भी अनदेखी की है.