साहिबगंज ( मंडरो )। प्रखण्ड क्षेत्र में बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया जितिया पर्व, जितिया व्रत के लिए सबसे पहले महिलाओं ने गंगा स्नान कर जितिया की शुभारंभ की जितिया व्रत महिलाओं के लिए विशेष महत्वपूर्ण रखता है, इस व्रत को जीवित्पुत्रिका नाम से भी जाना जाता है यह व्रत विशेष तौर पर सनातन धर्म मैं किया जाता है। इस व्रत को दिन और रात तक महिलाएं भूखी प्यासी निर्जला रहकर व्रत को करती है जितिया पर्व में एक बूंद जल भी ग्रहण नहीं किया जाता है। इस व्रत की कथा महाभारत काल से संबंधित है धार्मिक कथाओं के अनुसार महाभारत के युद्ध में अपने पिता की मौत का बदला लेने की भावना से अश्वत्थामा पांडवों की शिविर मे घुस गए शिविर के अंदर 5 लोग सो रहे थे अश्वत्थामा ने उन्हें पांडव समझ कर मार दिया परंतु वे द्रोपदी की 5 संताने थी। फिर अर्जुन ने अश्वत्थामा को बंदी बनाकर उसकी दिव्य मनी ले ली अश्वत्थामा ने फिर से बदला लेने के लिए अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ में पल रहे बच्चे को मारने का प्रयास किया और उसने ब्रह्मास्त्र से उत्तरा की अजन्मी संतान को फिर से जीवित कर दिया गर्भ में मरने के बाद जीवित होने के कारण उस बच्चे का नाम जीवित्पुत्रिका रखा गया तब उस समय से ही संतान की लंबी उम्र के लिए जितिया का व्रत रखा जाने लगा ।हालांकि इस व्रत में और भी कई कथाएं जुड़ी हुई है।