मुद्दा हेमंत सरकार की देन है: प्रदेश मंत्री

लोहरदगा। भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा झारखंड प्रदेश के मंत्री अजातशत्रु ने भाषा मुद्दा पर कहा है कि यह मुद्दा हेमंत सरकार की देन है जो राजनीतिक अपरिपक्वता का परिचायक है,संभव है कि आने वाले समय में भाषा के नाम पर हेमंत सरकार ने झारखंड मे जो आग लगाने का कार्य किया है उसमें वह स्वत: जलकर भस्मीभूत हो जाए । उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य के विकास लिए भाषा विवाद का विषय नहीं होनी चाहिए। भाषा तो सदा श्रद्धा की विषय रही है। इसे विकास का आधार बनाकर जन- कल्याण का मार्ग प्रशस्त करनी चाहिए, परंतु जब से कांग्रेस और राजद के समर्थन से हेमंत सोरेन के नेतृत्व में जेएमएम की सरकार झारखंड में बनी है तब से विकास के कार्यों से मतलब ना रखते हुए इस तरह कि उटपटांग कार्य करना इस सरकार की फितरत सी बन गई है । अजातशत्रु ने कहा कि जिस राज्य में भाषा, ऊंच-नीच और जाति- धर्म के नाम पर विवाद सरकार द्वारा खड़ा किया जाता हो वह राज्य कभी विकास नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि सभी भाषा और भाषी का सम्मान होना चाहिए यह स्वस्थ लोकतंत्र के लिए आवश्यक है।किसी भी राज्य की क्षेत्रीय भाषा और संस्कृति वहां की पहचान होती है उसके साथ छेड़छाड़ करना दंडनीय अपराध है। अपनी राजनीतिक स्वार्थ के कारण भाषा के नाम पर विवाद खड़ा करना और किसी खास भाषा को झारखंड का सिरमौर बनाकर तुष्टीकरण की राजनीति करना किसी भी तरह से झारखंड के हित में नहीं है।अजातशत्रु ने कहा कि हिंदी हमारे देश की राष्ट्रभाषा है। इसका अपमान तो कतई नहीं होनी चाहिए क्योंकि राष्ट्रभाषा का अपमान राष्ट्र का अपमान है और दुख तो इस बात की है कि झारखंड में हिंदी जैसी सर्वमान्य भाषा की भी हेमंत सरकार के द्वारा अपमान की जा रही है। अजातशत्रु ने कहा कि कम से कम हेमंत सरकार को चुनाव के दौरान जारी की गई अपनी पार्टी की घोषणा- पत्र को भूलना नहीं चाहिए| और यदि झारखंड की जनता या राजनीतिक पार्टियां उन्हें घोषणा पत्र में किए गए वादों को याद दिलाने का कार्य करें तो बौखलाहट में आकर इस तरह का उल्टा- सीधा कार्य नहीं करना चाहिए जिससे झारखंड को अपूरणीय क्षति पहुंचे।अजातशत्रु ने झारखंड सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि इस तरह की बचकाना और अदूरदर्शी कार्य कर झारखंड में रहने वालों के बीच आपसी तनाव पैदा कराने का काम बंद हो ,अन्यथा भारतीय जनता युवा मोर्चा पूरे झारखंड में हेमंत सरकार के खिलाफ जोरदार आंदोलन छेड़ेगी और आने वाले समय में निसंदेह वर्तमान सत्तासीन सरकार को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा ।

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