चरही । हज़ारीबाग जिले के चुरचू प्रखंड चरही कोयला अंचल क्षेत्र तापिन साउथ कोलियरी में सी सी एल प्रबंधन व हाई पॉवर कमेटी हो रहे हैं मालामाल मजदूरों के नाम पर पर गाड़ी 7250 रुपये वसूले जाते हैं। कमेटी एवं संचालन डंप खोलें एक साल हो चुका है और अभी तक में कुल गाड़ियों का हिसाब देखा जाए तो चार करोड़ उंचास लाख पचास हजार (4,49,50,000) हो चुके हैं। और तापिन साउथ लोकल से में कुल छे सौ (600) दंगल है जिसमें विस्थापित एक सौ दंगल और प्रभावित पांच सौ (500) दंगल है। कुल मजदूरों 6000 हज़ार होते हैं जो मजदूरों को अब तक एक मजदूर को मात्र रैयत विस्थापित के दंगलों को पंद्रह सौ(1500₹) एक साल में मजदूरी मिला है  और प्रभावित दंगल को एक आदमी में तीन सौ तीस रुपये(330) कर के एक साल में मजदूरी दिया गया है।
बॉक्स में : कौन-कौन करते हैं लोकल सेल में पैसा का उगाही।
राजेंद्र महतो विन्सेन्ट टूडू गणेश मांझी जीवलाल मांझी।

बॉक्स:- उगाही पैसा कहां जाती है।

राजेन्द्र महतो विंसेंट टुडू  गणेश मांझी व जीवलाल मांझी के द्वारा हर दिन का उगाही पैसा रैयत विस्थापित अध्यक्ष राम किशोर मुर्मू व सचिव मन्नू टुडू के यहां  प्रति दिन का पैसा जमा होता है। इसके बाद अध्यक्ष सचिव द्वारा इन सभी पैसों को दंगल को कुछ दिया जाता है उसके बाद वहीं से बाकी पैसा बंदरबांट किया जाता है। इस बंदरबांट में है हाय कोर कमेटी के कुछ सदस्य व विस्थापित के अध्यक्ष राम किशोर मुर्मू व सचिव मन्नू टुडू द्वारा इससे बचे हुवे पैसा को बंदरबांट किया जाता है।

मजदूरों को अब तक कुल कितना भुगतान किया जा चुका है। प्रभावित दंगल को कुल भुगतान सोलह लाख पैसठ हज़ार रुपये (16,65,000) और विस्थापित को 15,0000 लाख रुपये ही मिला है।

जिस प्रकार 29 सितंबर को एक वीडियो लोकल सेल्फ विस्थापित मोर्चा के कार्यालय से जो रंगदारी वसूल रहे वीडियो वायरल हुई थी इस मामले को जांच करने में क्या पुलिस प्रशासन गंभीरता पूर्वक जांच करेंगें। इस मामला अब जांच का विषय बन चुका है अगर इसके बारे में प्रशासन या सीसीएल प्रबंधक गंभीरता पूर्वक जांच नहीं करती है तो कहीं ना कहीं सी सी एल प्रबंधक का भी इस मामले में हाथ होगा इस प्रकार से वीडियो में सी सी एल प्रबंधक को भी कंही न कंही हिस्सा मिलता होगा विदेशी में साफ साफ कहा जा रहा है। अगर इस मामले को गंभीरता पूर्वक सी सी एल प्रबंधक संज्ञान में नहीं लेते हैं तो क्या इस मामले में जनक भी हिसा हो सकते हैं। यह तो जांच  का विषय है अगर  जिला प्रशासन भी इस मामले को गंभीरता पूर्वक लेने की जरूरत है।