रांची । माध्यमिक शिक्षा निदेशालय में कोरोना के कारण अप्रैल से मई 2021 तक लागू किये गये लॉकडाउन के कारण कार्यालय लगभग बंद रहा था. इसके कारण कई मामले पेंडिंग हो गये थे. अब कार्यालय नियमित होते ही लंबित कॉम्प्लेक्स मामलों के निष्पादन शुरू किया गया है. निदेशक हर्ष मंगला ने 15 मार्च को योगदान दिया था. उन्होंने लंबित मामलों को तेजी से निपटाने के लिए क्लीन ड्राइव शुरू कर दिया है.

माध्यमिक शिक्षा निदेशालय के निदेशक हर्ष मंगला ने कहा कि इस ड्राइव से बहुत कम समय में ही लंबे समय से पेंडिंग मामलों का निपटारा होने लगा है. इसमें कांप्लेक्स, लांग पेंडिंग, एविडेंशियरी, एडजुटिकेबल, नैचुरल जस्टिस अपार्च्युनिटी मामले शामिल थे.

मामलों में जारी है प्रगति

  1. PGT शिक्षकों की सेवा वर्ष 2014 से ही नहीं हुई थी. ऐसे लम्बित सभी 828 मामलों की सेवा संपुष्टि गत 2 महीने में की गई. लगभग 1300 मामले ज़िलों से मांगे गए है.
  2. TGT शिक्षकों की सेवा संपुष्टि का अभियान चलाया गया है. यह कार्य ज़िला स्थापना समिति से होना है.
  3. अल्पसंख्यक शिक्षकों के नियुक्ति अनुमोदन के कई मामले वर्ष 2016 से ही लम्बित थे. ऐसे 6 मामलों को अनुमोदन कर दिया गया है और 150 अन्य मामलों के लिए कार्मिक से परामर्श मांगा गया है. परामर्श आने के दो महीने में इनको निष्पादित कर दिया जाएगा.
  4. अल्पसंख्यक शिक्षकों को अब तक NPS योजना से आच्छादित नहीं किया जा सका है. जबकि वर्ष 2006 में ही इस सम्बंध में अधिसूचना निर्गत है. अब इसका संकल्प बनाकर विभिन्न विभागों में अनुमोदन के लिए भेज दिया गया है.
  5. CBSE/ICSE स्कूलों की मान्यता के लगभग 45 मामले कार्यालय में वर्ष 2016-17 से ही पड़े थे. इनमे से 24 पर निर्णय ले लिया गया है और अन्य प्रक्रियाधीन है.
  6. परियोजना विद्यालयों के कर्मियों की सेवा संपुष्टि के लम्बित मामलों को समिति बनाकर जांच करने का निर्णय लिया गया है. पहले ये मामले न्यायालय का आदेश आने पर एक-एक कर उठाए जाते थे. लेकिन अब अभियान चलाकर योग्य शिक्षकों को लाभ दिया जा रहा है. अब तक लगभग 50 मामलों को निष्पादित कर दिया गया है. जिन्हें 1989 से ही वेतन भुगतान इत्यादि किया जाएगा.
  7. न्यायालय में चल रहे मामलों में लगभग 100 मामलों में स्टेटमेंट आफ फैक्ट्स दायर करके अवमानना वादों में लगभग 40 मामले कम हुए है.

गढ़वा में डीसी रहने के दौरान भी कई लंबित मामले निपटाये थे
इसी ड्राइव के तहत गढ़वा ज़िले में उपायुक्त रहते कई मामले जो वर्षों से फ़ाइलों में बंद थे उनको निष्पादित किया गया. जैसे सबसे महत्वपूर्ण सभी चौकीदारों की सेवा 1990 के बाद से ही संपुष्ट नहीं हुई थी उसको निष्पादित किया गया.