इस वर्ष आठ दिनों की होगी पूजा

माता रानी का आगमन पालकी पर विदा होंगी हाथी पर

पाकुड़ । इस वर्ष नवरात्रि अश्वनी मास के शुक्ल पक्ष के प्रतिपदा से यानी 7 अक्टूबर गुरुवार से प्रारंभ होकर 15 अक्टूबर विजयादशमी तक होगी । इसके पूर्व 06 अक्टूबर को महालया होगी। माता रानी इस वर्ष डोली पर आएंगी ओर हाथी पर विदा होंगी।नवरात्रि के नौ दिनों में मां के नौ रूपों की विशेष पूजा अर्चना की जाती है। किंतु तृतीया एवं चतुर्थी तिथि एक ही दिन पड़ने से नवरात्रि की पूजा इस वर्ष 9 दिनों के बजाय 8 दिनों की ही होगी। ज्योतिष शास्त्र एवं पंचांग के अनुसार 9 अक्टूबर दिन शनिवार को तृतीय एवं चतुर्थी तिथि एक ही पड़ने से से तृतीय एवं चतुर्थी की पूजा 9 अक्टूबर को होगी। 9 अक्टूबर शनिवार को तृतीया तिथि सुबह 7:48 तक की रहेगी । तत्पश्चात चतुर्थी तिथि प्रारंभ हो जाएंगे। जो 10 अक्टूबर को प्रातः 5:00 बजे तक रहेगी। फल स्वरूप तृतीय एवं चतुर्थी की पूजा कुछ अंतराल में एक ही दिन करना श्रेयस्कर होगा। इसमें कुछ मतांतर हो सकता है। अच्छा होगा कि इस संबंध में आप अपने नजदीकी पंडित जी से पूरी जकरी लेकर ही पूजा अर्चना करे। बताया गया कि पूजा शुभ मुहूर्त 6:17 से 7:07 तक है। कही घट स्थापना का समय 09 :33से 11:31 तक । अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:45 से 12:32 तक बताया गया है । भक्त अपनी सुविधानुसार ब्रह्म मुहूर्त, चौघड़िया मुहूर्त,अभिजीत मुहूर्त, लग्ना अनुसार मुहूर्त में अपने पंडित से राय लेकर घट की स्थापना कर पूजा अर्चना करते हैं। प्रथम दिन 7 अक्टूबर गुरुवार को मां शैलपुत्री की पूजा अर्चना की जाएगी । दूसरे दिन 8 अक्टूबर शुक्रवार को मां ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन नव अक्टूबर शनिवार को मां चंद्रघंटा एवं मां कुष्मांडा की पूजा अर्चना विधि विधान के साथ की जाएगी । चौथे दिन 10 अक्टूबर को मां स्कंदमाता, पांचवें दिन 11 अक्टूबर को मां कात्यायनी , छठे दिन 12 अक्टूबर को मां कालरात्रि, सातवां दिन 13 अक्टूबर को महागौरी एवं आठवां दिन 14 अक्टूबर को मां सिद्धिदात्री ,महानवमी ,हवन, कन्या पूजा का विधान है । कहीं-कहीं यह कन्या पूजन अष्टमी के दिन भी किया जाता है । दो वर्ष से 10 वर्ष की कन्या मां दुर्गा देवी के विभिन्न रूपों का प्रतिनिधित्व करती है। जिन्हें कुमारी, त्रिमूर्ति, कल्याणी,रोहणी,काली, चंडिका,शांभवी,दुर्गा, भद्र व सुभद्रा के नाम से जाना जाता है। 10 अक्टूबर को विजयादशमी अर्थात दशहरा का उत्सव मनाया जाएगा। मूर्ति विसर्जन किया जाएगा। इस दिन नीलकंठ के दर्शन करना शुभ माना जाता है।
पूजा के लिए सही जानकारी अपने पंडित जी से लेकर ही करें।