रांची । राज्य के 510 हाईस्कूलों में कार्यरत शिक्षकों को सेलेक्शन स्केल (प्रवरण वेतनमान) का लाभ तभी मिलेगा जब उनके पास पोस्ट ग्रेजुएट की डिग्री रहेगी. इससे संबंधित आदेश स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने जारी किया है. जारी पत्र में विभाग ने साल 2016 के पत्र का हवाला दिया है. विभाग के इस आदेश का संघ ने विरोध करना शुरू कर दिया है. पत्र के अनुसार सेलेक्शन स्केल के लिए यह अनिवार्य है कि शिक्षक की नियुक्ति जिस विषय के लिए हुई हो, उस विषय में उनके पास स्नातकोत्तर (पीजी) की डिग्री हो.

माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने इसके पीछे एकीकृत बिहार व केंद्र सरकार द्वारा जारी निर्देशों का हवाला दिया गया है. शिक्षकों को प्रवरण वेतनमान में प्रोन्नति 24 वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद दी जाती है. प्रोन्नति जिला में स्वीकृत पद के 20 फीसदी पद पर देय होगा. प्रोन्नति में वरीयता व आरक्षण रोस्टर का पालन करने को कहा गया है.

शिक्षक संगठनों की माने तो पत्र के आधार पर हाईस्कूल के स्नातक प्रशिक्षित शिक्षकों को प्रवरण वेतनमान में प्रोन्नति देने का प्रावधान है. शिक्षक संघ के अमरनाथ झा ने बताया कि इसी प्रावधान के आधार पर गढ़वा, देवघर व पाकुड़ में शिक्षकों को प्रोन्नति दी गयी है. उन्होंने बताया कि वर्ष 2016 के पत्र में केंद्रीय विद्यालय का जिक्र एमएसीपी का लाभ नहीं देने को लेकर किया गया है, न कि वरीय वेतनमान व प्रवरण वेतनमान को लेकर.

विभागीय आदेश के खिलाफ संग ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और शिक्षा सचिव को पत्र लिखा है. जिसमें नियमों की उपेक्षा किये जाने की बात कही है.

जिलों में फिर से तैयार होगी सूची

जिन जिलों में स्नातक प्रशिक्षित शिक्षकों को प्रवरण वेतनमान का लाभ दिया जा रहा है, उन जिलों में भी अब पत्र जारी होने के बाद इस पर रोक लग सकती है. रांची समेत कई जिलों में प्रोन्नति देने के लिए शिक्षकों की सूची तैयार की गयी थी, अब जिलों में नये सिरे से प्रोन्नति के लिए शिक्षकों की सूची तैयार की जायेगी. प्रोन्नति से शिक्षकों को प्रतिमाह लगभग तीन हजार रुपये का वित्तीय लाभ मिलेगा.