लोहरदगा । बैंक ऑफ इंडिया, रांची अंचल, लोहरदगा की ओर से नया नगर भवन में ऋण मेला “Credit Outreach Programme” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि के रूप में जिले के उपायुक्त दिलीप कुमार टोप्पो व अन्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। कार्यक्रम में कुल 328 बैंक खातों में 10 करोड़ 62 लाख 80 हजार रुपये का ऋण वितरण किया गया। इसमें कृषि से संबंधित 196 बैंक खातों में 98.95 लाख रु, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग से जुड़े 76 बैंक खातों में 270.3 लाख रु और खुदरा व्यापार से जुड़े 56 बैंक खातों में 693.55 लाख रु शामिल हैं।
इस मौके पर उपायुक्त ने कहा कि किसानों को ऋण सही समय पर मिले इसके लिए किसान, बैंक और संबंधित विभाग के पदाधिकारियों के बीच आपसी समन्वय होना बहुत जरूरी है। बैंकों की स्थापना के पूर्व किसान ऊंची दरों पर ऋण लेते थे। इस ऋण को चुकाने में किसान का सब कुछ दांव पर लग जाता था और वह अक्सर साहूकार के कर्ज से नहीं उबर पाता था। बाद में देश की बैंकिंग व्यवस्था सुदृढ़ हुई और किसानों के काफी सस्ते दर पर ऋण मिलने लगा। लेकिन आज भी किसान के लिए बैंक से ऋण प्राप्त करना काफी मुश्किल कार्यों में एक है। इस दिशा में बैंकों को उदार होने की जरूरत है। किसान जब बैंक में ऋण के लिए आवेदन देता है तो बैंक उस आवेदन की आवश्यक जांच कर तुरंत ऋण स्वीकृत करें ताकि किसान अपने किसानी कार्य की जरूरतें पूरी कर सकें।

जिले में 52 हजार से अधिक पीएम किसान सम्मान निधि के लाभुक

उपायुक्त ने कहा कि लोहरदगा जिले में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से 52 हजार से अधिक किसान लाभान्वित हैं। सरकार ने सभी किसानों को केसीसी से आच्छादित करने का निर्णय लिया है। इसके अतिरिक्त वैसे किसानों को भी केसीसी देना है जो बेहतर किसानी कार्य कर रहे हैं। केसीसी ऋण से सस्ता कोई भी ऋण नहीं है। बैंक किसानों के प्रति अच्छी सोच रखें और उन्हें ऋण उपलब्ध कराएं।

समय से ऋण चुका कर विश्वास जीतें किसान

किसानों को चाहिए कि अगर उन्हें बैंक से ऋण मिल जाता है तो वे फसल उपजा कर और उस उपज को बेचकर सबसे पहले बैंक का ऋण चुकाएं, बैंक का विश्वास जीतें। अगर बैंक का आप विश्वास जीत लेते हैं तो कभी भी ऋण मिलने में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होगी। किसान ऋण लें तो उसका बेहतर उपयोग कृषि कार्य मे करें। अमेरिका और यूरोपीय देशों में भी लोग ऋण लेते हैं और अपना उद्देश्य पूरा कर ऋण की राशि समय से बैंक को वापस कर देते हैं। हमारे देश में भी उदाहरण के तौर पर आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में भी किसान अपनी फसल बेचकर पहले ऋण चुकाते हैं, जिसके बाद बैंक भी वैसे किसानों को तुरंत अगले वर्ष के लिए ऋण देती है।

कृषि के साथ पशुपालन भी करें

किसान कृषि के साथ-साथ पशुपालन कार्य भी करें तभी आय में वृद्धि होगी। पूंजी की दिक्कत नहीं होगी। किसान बंधु दुग्ध उत्पादन, मुर्गी,बत्तख,सुकर, बकरी पालन से भी जुड़ कर अपनी आय वृद्धि कर सकते हैं। लोहरदगा जिले में कई सेक्टर में उत्पादन की संभावनाएं हैं जिसमें हम अग्रणी बनकर निर्यातक बन सकते हैं।