शिकारीपाड़ा/दुमका।सदियों से सरकारी विकास कार्यों में नजरअंदाज का खेल झेल रहे शिकारीपाड़ा प्रखंड अंतर्गत संताल बहुल आदिवासी ग्राम सह पंचायत बांकीजोर के महिला-पुरूषों ने बाद टोला से लेकर नीम टोला तक दैनिक आवागमन में कीचड़युक्त, गड्ढेनुमा व बदहाल कच्चा रास्ता से तंग आकर आज पूर्व जिला आदिवासी कांग्रेस अध्यक्ष हाबिल मुर्मू के नेतृत्व में पक्की सड़क निर्माण की मांग को लेकर साढ़े तीन किलोमीटर जर्जर रास्ता में पदयात्रा किया। इस दरम्यान ग्रामीणों ने अपनी आवागमन रास्ता की कठिनाईयों से निजात पाने और स्थानीय प्रशासन का ध्यानाकर्षण करने के लिए
“बांकीजोर के आदिवासियों को पक्की सड़क देना होगा, झूठा आश्वाशन नहीं चलेगा, झामुमो विधायक नलिन सोरेन होश में आओ, जिला प्रशासन होश में आओ, प्रखंड प्रशासन होश में आओ, जैसे अन्य नारे लगाकर यथाशीघ्र यथास्थिति की संज्ञान लेने की मांग कर रहे थे।
ज्ञात हो कि बांकीजोर ग्राम के आदिवासी अपनी जर्जर और दुर्दशा आवागमन रास्ते से हो रहे तकलीफें और परेशानियों का दास्तान पूर्व जिला आदिवासी कांग्रेस अध्यक्ष हाबिल मुर्मू को सुनाते हुए कहते हैं कि स्थानीय झामुमो विधायक नलिन सोरेन की निष्क्रियता और प्रशासन के अनदेखी व उपेक्षा के कारण आज भी हम आजाद भारत में आदिम युग की तरह जीने के लिए विवश हैं। वे आगे बताते हैं कि हमें बारिश के मौसम में अत्यधिक समस्या झेलना पड़ता है बाद टोला से लेकर नीम टोला तक तकरीबन साढ़े तीन किलोमीटर का रास्ता में अत्यधिक जलजमाव और कीचड़युक्त हो जाता है जिसपर साईकिल, मोटरसाईकिल चलाना तो दूर की बात, चप्पल पहनकर पैदल चलना भी संभव नहीं है। गाँव के बीमार व्यक्तियों को खटिया के सहारे ढोकर इलाज कराने के लिए ले जाना पड़ता है। अत्यधिक कीचड़युक्त रास्ता होने के कारण गाँव तक सरकारी अंबुलेंस वाले नहीं आना चाहते हैं। कीचड़युक्त रास्ते में प्रतिदिन स्कूल जानेवाले बच्चे के पैर फिसलने और गिरकर पोशाक गंदे हो जाने तथा हाथ-पैर मचकने व टूटने के भय के कारण विद्यालय जाने में रूचि नहीं लेते हैं और इधर गाँव के मवेशियों का पैर कीचड़युक्त रास्ते में गहराई तक फंस जाता है। जिसके भय से सभी मवेशी रास्ते के अगल- बगल खेतों के मेढ़ में चलने लगते हैं और फसलों को चरने लगते हैं । इस रास्ते की बदहाली कारणों से तथा मवेशियों द्वारा फसल चरने जैसी घटनाएं होने से अक्सर कई बार ग्रामीणों के बीच आपसी कहासुनी, झगड़ा झंझट की मामला थाना तक पहुँच जाता है जो आपसी शांति भंग होने का मामला हो जाता है।
मौके पर उपस्थित गाँव के महिला-पुरूषों ने सरकार से अविलंब पक्की सड़क निर्माण का मांग में सहयोग प्रदान करने संबंधी हाबिल मुर्मू के समक्ष प्रस्ताव दिया।
हाबिल मुर्मू ने बांकीजोर के आदिवासियों के बदहाल रास्ता और प्रशासनिक उपेक्षा के प्रति चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि शिकारीपाड़ा प्रखंड से सरकार को भारी मात्रा में पत्थर खदान व क्रशर उद्योग से राजस्व मिल रहा है तथा देश में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना रहने के बावजूद भी आदिवासी ग्रामों को पक्की सड़क से वंचित रखना, यह एक सरकारी अन्याय और शोषण है। श्री हाबिल मुर्मू ने सरकार से मांग किया कि बांकीजोर ग्राम के आदिवासियों के लिए अविलंब पक्की सड़क निर्माण किया जाय।
इस अवसर पर प्रखंड कांग्रेस के मीडिया प्रभारी गौरव कुमार सिंह, वरिष्ठ कांग्रेसी गोपीजीवन पाल, जोसेफ सोरेन, बुधन मरांडी, कारू मियां, प्रभु टुडू, मंत्री सोरेन सहित भारी संख्या में बांकीजोर के प्रभावित महिला-पुरूष उपस्थित थे।