हजारीबाग । दुर्गा पूजा के वक्त परीक्षा प्रपत्र भरने की तिथि निकलना और इतना कम वक्त छात्रों को परीक्षा प्रपत्र भरने के लिए देना कहीं से जायज़ नहीं।कुलपति के अपरिपक्व निर्णय का सिलसिला जारी है।जहां कल चौथी बार डिट की होने वाली परीक्षा की तिथि बढ़ाई गई वहीं स्नातक समेस्टर चार और स्नातकोत्तर दो की परीक्षा प्रपत्र भरने की तिथि घोषित की गई है।डिट की परीक्षा की तिथि पिछले महीने के २६ तारीख़ से हाई लगातार बढ़ाई जा रही है।चार बार तिथि बढ़ाने के बाद अब विश्वविद्यालय ने २१ नवम्बर को परीक्षा की तिथि निर्धारित की है।ज्ञात हो की डिट की परीक्षा में अलग अलग विश्वविद्यालय के छात्र हिस्सा लेते हैं,बार-बार तिथि बढ़ाने से विश्वविद्यालय की गरिमा धूमिल हुई है।
महासप्तमी से दशमी तक का समय जहां बाज़ार में काफ़ी भीड़ होगी वहीं ऑनलाइन फ़ॉर्म भरे जाने के लिए कैफ़े का रुख़ छात्रों को करना होगा।मामला समझ के परे है की विश्वविद्यालय प्रशासन या तो धार्मिक गतिविधियों से युवकों को दूर कर रहा है या फिर इस तरह का लिया गया निर्णय प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है।बिना सोंच विचार के परीक्षा की तिथि निकालना और हर बार उसमें बदलाव करना प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है।विश्वविद्यालय प्रशासन को पूरे मामले पर पुनः विचार करते हुवे फ़ॉर्म भरने की तिथि को अविलम्ब बढ़ाने का काम किया जाए।