आरएसएस स्वयंसेवकों का घोष वादन के साथ पथ संचलन एवं शस्त्र पूजन

साहिबगंज । मंगलवार को विजयादशमी के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ साहिबगंज के कार्यकर्ताओं ने स्थानीय पुलिस लाइन स्थित शिव मंदिर से पूर्ण गणवेश में घोष वादन के साथ नगर के पूर्वी क्षेत्र में पथ संचलन किया। बड़ी संख्या में स्वयंसेवकगण प्रणव की चोट पर कदम से कदम मिलाते हुए अनुशासन के साथ संतुलित गति से आगे बढ़ते दिखे। इस संचलन को देखकर नागरिकगण स्वयं को आश्वस्त व गौरवान्वित महसूस कर रहे थे, उन्होंने आगे बढ़कर पथ संचलन का स्वागत किया। कई स्थानों पर नागरिकों व मातृशक्ति ने भी पुष्प वर्षा कर इन स्वयंसेवकों का मान बढ़ाया। पथ संचलन का समापन गंगा विहार पार्क स्थित कार्यक्रम स्थल पर हुआ, जहां स्वयंसेवकों ने ध्वजारोहण के पश्चात शस्त्र पूजन भी किया। इस अवसर पर संबोधित करते हुए विभाग प्रचार प्रमुख व बौद्धिक कर्ता राजीव कुमार ने बताया की हमारे राष्ट्र जीवन में अनेक सामाजिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक एवं राष्ट्रीय महत्व के प्रसंग भरे पड़े हैं, इन प्रसंगों से हमारा समाज अनुप्राणित होता रहता है। प्रत्येक प्रसंग के साथ हमारे उत्सव भी जुड़े हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नीति निर्माताओं को जब और जिन विशेष गुणों की आवश्यकता महसूस हुई, तदनुसार उत्सवों की भी योजना की। इन्हीं छह उत्सवों में से एक है विजयादशमी उत्सव। जिस के निमित्त आरएसएस के सभी स्वयंसेवक एकत्रित हुए। ऐसी मान्यता है कि विजयादशमी के दिन ही भगवान श्रीराम ने वनवासियों व वानरों को संगठित कर बड़ी सेना तैयार किया था तथा अत्याचारी आतंकी रावण का वध कर लंका पर विजय प्राप्त किया था। विजयादशमी के दिन ही आद्य सरसंघचालक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना किया था। डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार अपने बाल्यकाल से ही देश भक्ति से ओतप्रोत थे। उन्होंने ब्रिटिश महारानी विक्टोरिया के जन्मदिवस पर 5 वर्ष की अवस्था में ही विद्यालय में मिठाई लेने से इनकार कर दिया था तथा अपने सभी साथियों को भी ऐसा ही करने को कहा था। जिसके कारण उन्हें दंडित होना पड़ा। ऐसा प्रतीत होता है देश भक्ति उन्हें बचपन में ही घुट्टी के रूप में पिला दी गई थी। जब वे थोड़े बड़े हुए तो निकट के एक ट्रेडमिल पर लगे ब्रिटिश ध्वज को उतारने के असफल षड्यंत्र में शामिल हुए, जिसके लिए उन्हें दंडित भी होना पड़ा। स्कूली शिक्षा पूर्ण करने के बाद क्रांतिकारी गतिविधियों में शामिल होने के उद्देश्य से डॉक्टरी की पढ़ाई के बहाने वह कोलकाता चले आए, जहां उनकी भेंट उस समय के प्रखर क्रांतिकारियों के साथ हुई। उनकी संलिप्तता अनेक क्रांतिकारी गतिविधियों में होने लगी। कई क्रांतिकारी पकड़े भी गए जिन्हें अलग – अलग सजाएं दी गई और कुछ को फांसी की सजा भी हो गई। उन्होंने देखा कि इस प्रकार आसंगठित रह कर हमला करने से कुछ विशेष हासिल नहीं होने वाला था, अतः वे तत्कालीन कॉन्ग्रेस के नेताओं के संपर्क में आए व कांग्रेस में सम्मिलित हो गए तथा अत्यंत महत्वपूर्ण दायित्व को निभाया। तभी प्रथम विश्व युद्ध के पश्चात तुर्की में खलीफा को सत्ताच्युत करने की योजना पर ब्रिटिश हुकूमत काम कर रही थी। यद्यपि इस प्रकरण से किसी भारतीयों का कोई भी लेना – देना नहीं था, परंतु भारत के मुसलमान व मुस्लिम लीग खलीफा के पक्ष में आंदोलन कर रहे थे, जो अंग्रेजी में खलीपेट आंदोलन के नाम से जाना जाता था। परंतु यह आंदोलन विफल हो गया और खलीफा को सत्ता से हटा दिया गया, जिससे क्रुद्ध होकर भारत के मुसलमान, गैर मुसलमानों पर हमले करने लगे। केरल के मोपला में तो हद ही हो गई। वहां सूची बनाकर लाखों हिंदू परिवारों को बेघर कर दिया गया, उनकी संपत्तियां लूट ली गई। घरों की 13 से 40 वर्ष की महिलाओं की सूची बनाकर उनका अपहरण कर लिया गया। भयानक अत्याचार, धर्म परिवर्तन व हत्याएं हुई। इन अत्याचारों का जिक्र वीर सावरकर द्वारा रचित उपन्यास मोपला मे एनी बेसेंट लिखित पस्तक “दी फ्यूचर ऑफ इंडियन पॉलिटिक्स” तथा डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा लिखित पुस्तक “दी पार्टीशन ऑफ इंडिया” जैसे अनेक पुस्तकों में मिलता है। इस त्रासदी को डॉक्टर साहब ने बारंबार कांग्रेस कार्यसमिति के समक्ष उठाया, परंतु कांग्रेस ने इस विषय को नजर अंदाज कर दिया। उलटा खलीपेट आंदोलन को अंग्रेजों के विरुद्ध खिलाफत आंदोलन का नाम दिया तथा समर्थन व पुरस्कृत भी किया। हिंदुओं के बारे में आवाज उठाने वाला कोई भी नहीं रहा। जिससे क्षुब्ध होकर 1923 में उन्होंने कांग्रेस छोड़ने का निर्णय लिया तथा कहा “मैं एक ऐसा संगठन खड़ा करूंगा जो अगले 100 साल में ही सही लेकिन कांग्रेस का नामोनिशान मिटा कर रख देगा”। वह चिंतन मनन करते रहे, तब जाकर 1925 में विजयादशमी के दिन केवल 17 बच्चों को लेकर उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की, जो आज विश्व का सबसे अनुशासित और सबसे बड़ा संगठन बन चुका है तथा अपने विविध अनुषांगिक संगठनों के माध्यम से न केवल पूरे देश में परिवर्तन लाने में सक्षम है, बल्कि विविध क्षेत्रों में संपूर्ण विश्व का नेतृत्व भी कर रहा है। हिंदू राष्ट्र भारत को अखंड रूप में परम वैभव तक ले जाना ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक का लक्ष्य है। विजयादशमी के उपलक्ष में सभी स्वयंसेवकों ने इस लक्ष्य के प्रति समर्पण का संकल्प भी लिया।
कार्यक्रम में विभाग संघचालक विजय कुमार, जिला संघचालक डॉ. राजकुमार मुख्य, अतिथि डॉ. देवब्रत मंचासीन थे। मंच संचालन नगर कार्यवाह स्वप्न कुमार, मुख्य शिक्षक का दायित्व मिथुन कुमार, प्रार्थना प्रमोद कुमार, अमृत वचन समीर कुमार, सुभाषित सुनील कुमार, एकल गीत सह नगर कार्यवाह पुष्कर लाल तथा सामूहिक गीत जिला घोष प्रमुख कृष्ण बल्लभ ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में विभाग प्रचारक डिगेंद्र कुमार, सह विभाग कार्यवाह वासुदेव मंडल, विभाग विद्यार्थी प्रमुख मिथुन पांडे, विभाग व्यवस्था प्रमुख नितेश कुमार, विभाग सेवा प्रमुख रंजीत कुमार, जिला कार्यवाह सुनील कुमार, जिला संपर्क प्रमुख सुरेंद्र नाथ तिवारी, राजमहल विधायक अनंत कुमार ओझा, नगर परिषद अध्यक्ष श्रीनिवास यादव, नगर परिषद उपाध्यक्ष रामानंद साह, विभाग प्रचार प्रमुख राजीव कुमार प्रमुख रूप से उपस्थित रहे, वहीं मातृशक्ति में शारदा कुमारी, स्वर्णिम भारती, प्रीति कुमारी मुख्य रूप से उपस्थित रहीं।