कटकमदाग । पकरार ग्राम में कृषि के माध्यम से स्वरोजगार योजनाओं पर हुई चर्चा, जिसमें की प्रउत कृषि नीति पर विशेष चर्चा की गई और युवक किसानों के भी सभी समस्याओं पर चर्चा की गई। और बताया गया कि प्रउत अर्थात प्रगतिशील उपयोगी तत्व, प्रभात रंजन सरकार द्वारा प्रतिपादित ईश्वर केंद्रित यह प्रउत दर्शन, त्रुटिपूर्ण पूंजीवाद व साम्यवाद का कारगर विकल्प है।
जो आगाह संपदा चंद हाथों में केंद्रित होने के कारण आर्थिक महामंदी को आमंत्रण किया गया परिणाम स्वरुप बेरोजगारी भुखमरी व अपराधीकरण में बेतहाशा बढ़ोतरी हो रही है।

ऐसे ही युग संधिकाल में प्रउत दर्शन एक आशा का किरण बनकर विकेंद्रित अर्थव्यवस्था का मार्ग प्रशस्त किया।
नैतिक नेतृत्व द्वारा संचालित सहकारिता, कृषि को उद्योग का दर्जा, ब्लॉक स्तरीय योजना और संतुलित आर्थिक योजना द्वारा शत-प्रतिशत रोजगार का मार्गदर्शन कर भौतिक समृद्धि, मानसिक समृद्धि और अध्यात्मिक सिद्धि स्थापित कर एक खुशहाल सामाजिक व्यवस्था द्वारा मनुष्य जीवन जो की परमात्मा के अनमोल भेंट है इसे योग साधना के मार्ग द्वारा, जीवन का लक्ष्य आत्मानुभूति द्वारा, साधना सेवा त्याग तपस्या द्वारा, भारत को विश्व गुरु का जो पद प्राप्त था यह पुनर्जागरण का मार्ग प्रशस्त करने के क्रम में हजारीबाग पकरार, बसरिया के युवक बुद्धिजीवी किसान विद्यार्थी गन सेवा में सक्रिय है और प्रेरणा का उदाहरण पेश कर रहे हैं, यह जानकारी आचार्य प्रियतोषानंद प्राउटिस्ट ने दी।