गुजरे 10 वर्षों में 10 कदम भी आगे नहीं बढ़ा तिलोकरी-कैलाश लाल बरनवाल

कोडरमा । जयनगर प्रखंड का सबसे बड़ा गांव जो स्वयं में एक पंचायत है जहां विकास दूर-दूर तक नहीं दिखाई दे रहा हैं बताते चलें कि समाजसेवी कैलाश काल बरनवाल ने कहा कि क्या यही सपना संजोए थे तिलोकरी के आम ग्रामीण जनता।आज से 16 वर्ष पूर्व 2005 ईस्वी में तिलोकरी में भव्य यज्ञ का आयोजन हुआ था जिसे लेकर मंदिर निर्माण की क्रिया प्रारंभी की गई परंतु अभी तक निर्माण को तरस रहा है और अर्धनिर्मित मंदिर जहां सैकड़ों जनता की उम्मीद है परंतु ना तो यहां के जनप्रतिनिधि ना मंदिर बनाने में चुने गए पदाधिकारियों का इस ओर ध्यान है जबकि फंड में दो से ढाई लाख रुपए जमा है उन्होंने कहा कि
दुनिया चांद तक जाकर अब मंगल तक की सोचने लगी है, पर यह गाँव गंदगी, कुशासन, कुव्यवस्था, के चक्रव्यूह में ही फंस कर निचले पायदान में खिसक गया है |न तो कहीं रोड अच्छा, न तो कहीं नाली अच्छी,न तो रोड की लाइट सभी जगह 12 बजी हुई | तीनों कांटा चुपी साधे स्थिर खड़ी हो कर मौन, मातम के मारे चुप चाप |हिलने डुलने नाम नहीं मंदिर निर्माण के संबंध में पूछे जाने पर ग्रामीणों ने कहा कि पदाधिकारियों लोच व्यवस्था के कारण मंदिर निर्माण नहीं हो पा रहा है जिसके कारण सैकड़ों लोगों की आस्था पर ग्रहण लग चुका है वही विकास के नाम पर भी यह पंचायत डुगडुगी बजा रहा है जनता के द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि अपने किए गए वादों से पीछे हट चुकी है उन्हें शायद चुनाव के पहले किया गया वादा याद नहीं जिसके कारण विकास को मरहूम हो चुका है यह पूरा पंचायत। अभी दर्जनों लोग ऐसे हैं जिन्हें रहने का आवास नहीं दर्जनों विधवा ऐसी है जिसका विधवा पेंशन नहीं बना है कई ब्रिज ऐसे हैं जिन्हें बिरधा पेंशन का लाभ नहीं मिल रहा है इसकी जिम्मेवारी लेने वाला कोई नहीं है