गरीबों को भी हक है खुश होने का

रामगढ़ ( पतरातू ) | हम बात कर रहे हैं पारंपरिक ढंग से बनाए जाने वाले मिट्टी के दीए और बर्तनों के जिसे आज भी पतरातू क्षेत्र के जयनगर बस्ती के कई कुम्हार बंधु बड़े ही उत्साह और श्रद्धा से बनाते हुए नजर आते हैं। मगर उनके दिल में कहीं ना कहीं एक टीस भी है कि इसकी सही कीमत और उचित सम्मान नहीं मिलने से काफी दुखी हैं कुम्हार बंधु
पतरातू ही नही पूरे झारखण्ड राज्य में इन कुम्हार गरीबो को सरकार से उम्मीद है कि उनकी ओर भी ध्यान देगी सरकार। साथ ही आम जनता को भी बाहरी चाइनीज लाइट खरिदने के बजाय देश की पारंपरिक द्रोहर मिट्टी के दिए और बर्तन का उपयो करें। आगामी दीपावली में इन कुम्हार भाइयो ने जनता से अनुरोध किये है कि इस वर्ष जनता मिट्टी के दीपक ख़रीदे एवं मिट्टी के बर्तनों का उपयोग करें जिससे पारम्परिक धरोहर कला भी बची रहे और इन गरीबो की रोजी रोटी भी चलती रहे। हम सभी लोगो को भी आगे बढ़ कर इनकी मदद करनी चाहिए। यह गरीब कुमार कहते हैं कि हम इतनी मेहनत के साथ हम पूरे परिवार मिलकर इन दीयों और खिलौनों का निर्माण करते हैं। ऐसे में यदि लोग बाहरी चीजों की खरीदारी करेंगे तो हम गरीब कहां जाएंगे। हमारे इन पारंपरिक दीयों को कौन खरीदेगा। हमारा घर परिवार कैसे चलेगा??? अब यह एक ज्वलंत प्रश्न यह है कि क्या हम भारतवासियों कि यह जिम्मेवारी नहीं बनती कि इन पारंपरिक दीयों का निर्माण करने वाले इन गरीब कुम्हारों की हम मदद करें और उनके द्वारा निर्मित इन दीयों और खिलौनों की खरीदारी करें ताकि इनके घर में भी एक खुशहाली का दीया इस दीपावली जल सके।