साहिबगंज ( बरहरवा ) । नगर पंचायत क्षेत्र अंतर्गत झारखंड सेवा सदन नर्सिंग होम में दर्जनों पीड़ितों को चिकित्सक की गलती के कारण अपनी आंखें गवानी पड़ी है जो साहिबगंज जिले में बहुचर्चित और विवादित नर्सिंग होम के रूप में प्रदर्शित हो चुकी है जिला चिकित्सा पदाधिकारी अरविंद कुमार ने मामले को लेकर 5 सदस्य जांच टीम का गठन कर आवश्यक कार्रवाई हेतु अस्पताल के मौजूदा कामकाज का ब्यौरा एवं अनिवार्य दस्तावेजों स्मार्ट रिचार्ज कर जांच रिपोर्ट सपने की हामी जिला उपायुक्त एवं जिला चिकित्सा पदाधिकारी कार्यालय को सूचित करने को लेकर जिला यक्ष्मा पदाधिकारी थॉमस मुर्मू के नेतृत्व में जांच टीम बरहरवा झारखंड सेवा सदन निजी नर्सिंग होम पहुंच अस्पताल कर्मियों से पूछताछ कर उपयुक्त मामले पर रोशनी डालते हुए सभी पीड़ितों के नाम नंबर एवं अन्य विस्तृत जानकारी तथा मोबाइल नंबर मांगी साथ साथ ही ऑपरेशन करने वाले चिकित्सक की भी जानकारी मांगी ज्ञात हो कि अस्पताल प्रबंधक एवं कर्मियों द्वारा नर्सिंग होम संचालन हेतु अनिवार्य कागजात एवं दस्तावेज दिखाने में असमर्थ रही इसके बाद जांच टीम द्वारा जिला शिक्षा पदाधिकारी एवं उपायुक्त को दी गई साथ ही डॉक्टर थॉमस मुर्मू एवं स्थानीय चिकित्सा प्रभारी सरिता टू डू द्वारा प्रेस वार्ता के दौरान अस्पताल को लेकर किसी भी संपूर्ण दस्तावेज नहीं पाई गई वही सुबह के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा दो दिवसीय दौरे पर साहिबगंज जिला पहुंचते ही स्थानीय गतिविधि एवं मामले को लेकर मीडिया द्वारा सवाल करने के बाद संज्ञान में आते ही जिला चिकित्सा पदाधिकारी अरविंद कुमार एवं जिला उपायुक्त रामनिवास यादव को मामले की जानकारी मांगी एवं अस्पताल प्रबंधक को अधिकारिक नोटिस करने एवं लोगों को नेत्रहीन बनाने वाले चिकित्सक पर थाने में प्राथमिकी दर्ज करने एवं नर्सिंग होम को मामले की पूरी जांच होने तक अगले आदेश तक सील करने के निर्देश दिए गए जिस पर संज्ञान लेते हुए सिविल सर्जन एवं उपायुक्त द्वारा लिखित रूप से अस्पताल को लेकर सील करने हेतु पदाधिकारियों को निर्देश जारी किए गए है।जो असप्तताल के कामकाज को पूरी तरह से बंद कर कोई कामकाज न करने का अल्टीमेटम असप्तताल कर्मियों को दी गई।

आधिकारिक रूल से नहीं हुई अब तक शील :-

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन एवं जिला उपायुक्त के निर्देश झारखंड सेवा सदन को अधिकारिक रूप से सील करने अगले आदेश तक दिए गए थे परंतु नियमानुसार प्रावधानों के तहत सील करने की प्रक्रिया अब तक अधूरी नजर आ रही है जिस पर चिकित्सा पदाधिकारी एवं संबंधित पदाधिकारियों की कार्यशैली पर कई सवालिया निशान लग रहे हैं असमंजस की बात यह है कि जो मुख्यमंत्री के का निर्देश नियमानुसार अस्पताल को सील करने की दी गई थी उसके बावजूद भी अस्पताल के कर्मचारियों द्वारा दरवाजे को आवश्यकतानुसार खोलने बंद करने और आने-जाने के साथ-साथ चोरी-छिपे अधिकारिक निर्देशों को दरकिनार कर मनमानी करने की शिकायत स्थानीय लोगों द्वारा मिल रही है जो कई षड्यंत्र संयंत्रों के द्वारा फर्जी अस्पताल को संरक्षण देने वाले तथाकथित लंबे हाथ वाले लोग कानून के नियमों प्रावधानों एवं सरकार के निर्देशों को एक फिजूल और धूल झोंकने वाली काम कर रहे हैं।जो प्रश्नवाचक संकेत दे रही है।