चाईबासा। कोविड-19 के कारण पिछले 2 सालों से यह आयोजन नहीं हो पाया है। 2 सालों के बाद अब जब सम्मेलन हो रहा है तो समाज के लोगों में काफी उत्साह है। सामूहिक गोवारी यानी प्रार्थना के बाद हो भाषा वारंग क्षिति लिपि के जनक कोल गुरू लाको बोदरा और सागू समड को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसके बाद दिऊरी सम्मेलन की शुरूआत हुई। सम्मेलन के दौरान आदिवासी हो समाज की परंपरा और संस्कृति, सामाजिक त्योहार आदि के बारे में सदस्यों के बीच चर्चा की गई। युवा महासभा के जिला अध्यक्ष गब्बर सिंह हेंब्रम ने कहा कि पढ़ाई और नौकरी के कारण कोल्हान से बाहर अन्य राज्यों में हो समाज के लोग रह रहे हैं। जहां अपनी संस्कृति और सामाजिक त्योहारों को भूलते जा रहे हैं। युवा वर्ग सामाजिक संस्कृति से दूर होता जा रहा है। इस तरह के कार्यक्रम के जरिए हम नई पीढ़ी को अपनी सामाजिक संस्कृति से जोड़े रखने की कोशिश करते हैं। समाज की परंपरा में दिऊरी (पुजारी) का एक अहम रोल है। बहुत से दिऊरी युवा हैं। आज के सम्मेलन में इनके साथ कुल 12 मुद्दों पर संवाद हो रहा है। इस दौरान झारखंड, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, असम, महाराष्ट्र, दिल्ली और चेन्नई से आए प्रतिनिधि दिऊरी के साथ संवाद कायम करेंगे। समाज की संस्कृति में आ रही विसंगतियों पर मंथन होगा। ताकि हो समाज की संस्कृति को और मजबूत किया जा सके। 2 दिन के सम्मेलन के दौरान दिऊरियों को सम्मानित भी किया जाएगा।