सरकार पी0 पेसा 1996 कानून जल्द लागू करें, आदिवासी आधिकारों के खिलवाड़ कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे:- शिवचरण मलतो संयोजक।

पाकुड़ ( आमड़ापाड़ा ) । सोमवार को पतरापाड़ा में सरदार नारना पहाड़िया सरदार शुकदेव देहरी सरदार जबड़ा पहाड़िया तथा नायब के नेतृत्व में ग्राम प्रशासक समिति समूहों का एक आवश्य बैठक सम्पन्न हुई ।जिसमें प्रधान,गोड़ायत,नादो,भोगदोराजा,नवयुवक संघ एवं समिति के महिला पुरुष सदस्य उपस्थित हुए। बीर बाबा जबरा पहाड़िया (तिलका मांझी) की आत्मा की शांति और आशीर्वाद के लिए एक मिनट का मौन रखा गया।
ग्राम प्रधानों ने बारी बारी से अपना विचार व्यक्त किया गया और कहा कि हमें अपने हक और हुकुक के लिए एक साथ आना बहुत जरूरी है। यह वक्त की माँग है।

श्री शिवचरण मालतो संयोजक ने कहा कि हमारे अधिकार को लुफ्त करने के लिए हमारे जनप्रतिनिधियों के द्वारा लोलीपोप दिया जा रहा है ।इसके वजह से आदिवासी समाज के लिए संविधान प्रदत्त शक्तियों का क्षति पहुंचाने काम किया गया है।
जबकि संताल परगना काश्तकारी ( अनुपूरक ) अधिनियम 1949 बना और भारतीय का संविधान , नौवीं अनुसूची के क्रमांक 210 दर्ज हुआ। इसी के तहत ही प्रधानगणों को पट्टा निर्गत होता है। इन्हें निर्णय लेने का पावर,सजा देने का अधिकार प्राप्त है। जो spt Act ,1949 के धारा 6 के अनुसार ही बहाली होती है। लेकिन आज हमारे उपर संवैधानिक हमले हो रहे हैं। पावर पर हमले हो रहे हैं। जब कि spt Act , 37/ 1855 में प्रदत्त शक्तियों पर हमले हो रहे हैं जैसे-जिला के मालिक को उपायुक्त उल्लेखित है लेकिन आज उपायुक्त-सह-दण्ड अधिकारी का उपयोग होने लगा है। यह अनुसूचित क्षेत्रों में यह शब्द असंवैधानिक है ।यह संवैधानिक हमले हैं।
अनुसूचित क्षेत्रों में हो रहे हमले और छीनेे गए अधिकारों को रोकने के लिए ही संसदीय कानून पंचायत के उपबंध PROVISION OF THE PANCHAYAT ( EXTENSIONTO to the SCHEDULED AREAS) Act, 1996 ) प्रशासक और नियंत्रण करने की शक्ति प्रदत्त है तथा 23 प्रावधानों के साथ पी0 पेसा 1996 बनाया गया है। इसके अनुपालन प्रावधानों के लागू किये बीना अनुसूचित क्षेत्र के अधिकार को बचा पाना मुश्किल प्रतीत हो रहा है।
जिस राज्य में आदिवासी मुख्यमंत्री हो,जिस राज्य में आदिवासी राज्यपाल हो वहां अनुसूचित क्षेत्रों में हमारा संवैधानिक अधिकार का लागू ना होना शर्मनाक है।
अब हमें जरूरत है कि संसदीय कानून के प्रावधानों के अनुपालन में नियमावली प्रक्रिया पूरी होने अनुसूचित क्षेत्रों में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव पर रोक लगाया जाना आवश्यक है। तभी हम सुरक्षित रह सकें।
इस मौके पर मुख्य रूप से
सरदार जबडा पहाड़िया,नारना पहाड़िया,शुकदेव देहरी, सीताराम पहाड़िया नायब ,मोतीलाल पहाड़िया मुखिया,विनोद पहाड़िया,रमेश पहाड़िया सहित हजारों लोग उपस्थित हुए।