पिछले 150 वर्षों से लगातार की जा रही है यहां पूजा अर्चना

साहिबगंज। साहिबगंज जिला अंतर्गत राजमहल प्रखंड के घाट जमनी पंचायत के सरकंडा गांव स्थित जो गंगा नदी के किनारे बसे गांव योगिचक में मां काली मंदिर में मां काली की पूजा पिछले 150 वर्षों से की जा रही है इस वर्ष 4 नवंबर दिन गुरुवार को मां काली की पूजा अर्चना की जाएगी । ग्रामीण दुखू मंडल, फेकन यादव, सुबोध मंडल, तपन प्रमाणिक, मनोज भगत, का कहना है कि योगीचक में काली की पूजा शुरुआत लगभग 150 वर्षों से यह पूजा की जा रही है लगभग 1870 ईस्वी में इस मंदिर की स्थापना हुई थी।ग्रामीण के अनुसार गणेश मिस्त्री के परदादा शंकर मिस्त्री बहुत बड़े ओझा हुआ करता था। उन्होंने अंतर्मन से मां काली और भोले बाबा को जाते देखा तो उन्हें रुका कर और ग्रामीणों की सलाह से मां काली को ग्रामीणों के कल्याण के लिए उन्हें उतारा और उनको इस जगह पर विराजमान किया तभी से दुखू मंडल के पूर्वज एवं दुखू मंडल तथा पूरे ग्रामीणों के सहयोग से माँ काली की पूजा-अर्चना करते आ रहे है।
इस बार कोविड-19 को देखते हुए तैयारी की जा रही है ।
इस मंदिर में परंपरा है कि स्थापित प्रतिमा को पूजा के दूसरे दिन ही रात 12 बजे से पहले मंदिर के पास गंगा नदी में विसर्जित कर दी जाती है। साथ ही प्रतिमा को विसर्जित करने के लिए नगर भ्रमण नहीं किया जाता हैं। माँ काली की पूजा में सभी ग्रामीणों का भरपूर सहयोग से होता है।
नोट-प्रत्येक वर्ष माँ काली की पूजा के शुभ अवशर पर भक्ति जागरण का कार्यक्रम होता था लेकिन इस बात कोविड-19 को ध्यान में रखते हुए भक्ति जागरण का कार्यक्रम नहीं किया जाएगा।

भक्तों की होती है मुरादे पूरी

मां काली मंदिर में गुरुवार और शुक्रवार को मंदिर परिसर में काफी संख्या में दूर-दराज से भक्त मां के दर्शन करने और मन्नतें मांगने पहुंचते हैं । जब भक्तों की मन्नते पूरी हो जाती है तो मां के मंदिर में पाठे की बलि देखकर श्रद्धालु मां को खुश करते हैं।