लोहरदगा l ग्रेटर त्रिवेणी पब्लिक स्कूल लोहरदगा में धूमधाम के साथ दीपोत्सव मनाया गया। दीपोत्सव कार्यक्रम में विद्यालय के प्राचार्य एसके झा के मार्गदर्शन में शिक्षक रामचंद्र गिरि द्वारा लिखित राम की अयोध्या वापसी नाटक का भव्य मंचन किया गया। नाटक में दिखाया गया कि मर्यादा पुरुषोत्तम राम लंका से जीतकर वापस अयोध्या आए हैं और उनके स्वागत में अयोध्या को सजाया गया है, दीप जलाया गया है। राम से जब माता कौशल्या पूछती है कि तूने अत्याचारी रावण का वध कर दिया। तब राम ने उत्तर देते हुए कहा मां महाप्रतापी, महा बलशाली, महाज्ञानी, महादानी, शिव के परमभक्त और शिव- तांडव- स्तोत्र के रचयिता रावण का वध मैंने नहीं किया। रावण को रावण का मैं (अहंकार) ने मारा। राम ने कहा कि रावण को अहंकार हो गया था। वह अपनी प्रजा को सताना, ऋषि- मुनियों का अनादर करना यहां तक कि नारी का भी अपमान करना प्रारंभ कर दिया था। उसे ज्ञान, धन और बल का अहंकार हो गया था। यही दुर्गुण उसके अंत का कारण बना। विद्यालय की बच्चियों ने राम सहित माता सीता, भ्राता लक्ष्मण और भक्त हनुमान का स्वागत गान गाकर अभिनंदन किया। कार्यक्रम में विद्यालय के प्रबंधक अजातशत्रु और शैक्षणिक -मार्गदर्शिका जाह्नवी सिंह विशेष रुप से उपस्थित होकर कार्यक्रम की भूरी- भूरी प्रशंसा करते हुए कहा कि आपके द्वारा प्रस्तुत नाटक, स्वागत गीत, नृत्य और रंगोली को देखकर कहा जा सकता है कि आप में प्रतिभा की कमी नहीं है। आप हर प्रकार की भूमिका निभाने में सक्षम और निपुण हो चुके हैं। अपनी प्रतिभा को आप और निखारें विद्यालय प्रबंधन सदैव आपके साथ है। प्राचार्य एस के झा ने मर्यादा पुरुषोत्तम राम के मर्यादित व्यवहार और चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस के राम सहित सभी पात्रों का व्यवहार एवं चरित्र सभी युगों में अनुकरणीय रहेगा। शिक्षक रामचंद्र गिरि ने दीपावली पर्व के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कविता के माध्यम से छात्रों से आग्रह किया कि आप सभी दीपावली के अवसर पर विदेशों से आयातित सामग्रियों का उपयोग ना कर अपने लोगों द्वारा बनाए गए मिट्टी का दीप जलाएं और देश का पैसा देश में ही रहने दें। तभी हर दृष्टिकोण से हमारा देश, हमारा समाज और हमारा परिवार सक्षम और सबल हो सकेगा। कार्यक्रम को सफल बनाने में सुनीता चितौड़ा,सुनंदिनी, शिवम, शुभम, कौस्तुभ पांडे, अपर्णा गुप्ता, नीति झा, विशाल साहदेव, विकास साहदेव आशीष सिन्हा,एस सुजाउद्दीन राजा, दशरथ प्रजापति, विक्रम मिश्रा, रत्नेश मिश्रा, निहारिका अनिल एक्का, पंकज विश्वकर्मा, राहुल रंजन सिंह आदि शिक्षकों का सराहनीय योगदान रहा।