साहिबगंज ( उधवा ) । सूचना का अधिकार अधिनियम” का मूल उद्देश्य नागरिकों को सशक्त बनाने, सरकार के कार्य में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व को बढ़ावा देना,भ्रष्टाचार को नियंत्रित करना और वास्तविक अर्थों में हमारे लोकतंत्र के लोगों के लिए कामयाब बनाना है। यह कानून नागरिकों को सरकार की गतिविधियों के बारे में जानकारी देने के लिए एक बड़ा कदम है। दरअसल मामला “सूचना का अधिकार अधिनियम” आरटीआइ से शुरू हुआ है। झारखंड जन सेवा एन.जी.ओ. के राष्ट्रीय अध्यक्ष सद्दाम हुसैन अधिवक्ता ने उधवा प्रखंड अंतर्गत सभी आंगनबाड़ी की घोटाला को जनता के सामने उजागर करने के लिए “सूचना अधिकार अधिनियम-2005 ” के तहत प्रखंड के सभी आंगनबाड़ी की आवश्यक दस्तावेज की जानकारी लेना चाहा। उक्त आरटीआई बीते 05 मार्च को मांगा गया था।आंगनबाड़ी सेविकाओं द्वारा आवश्यक कागजात एवं पंजी प्रस्तुत नही करने पर बीते 02 सितंबर को सद्दाम हुसैन ने प्रथम अपील जिला समाज कल्याण पदाधिकारी,साहिबगंज में दायर किया।सूत्र के हवाले से पता चल रहा है कि आंगनवाड़ी सेविकाओ द्वारा संबंधित कागजात/आवश्यक पंजी को नहीं दिया।ताकि उनकी सारे घोटाले सामने आ जाते और इन पर एक बड़ी कार्रवाई हो जाती। अब जब मामला को दुबारा अपील दायर किया गया तो फिर से इनके होश उड़ गए। सद्दाम हुसैन का कहना है की प्रथम अपील दायर करने के बाद से ही मुझे कुछ असामाजिक तत्वों एवं अन्य लोगों द्वारा लगातार टारगेट करते रहे। जगह जगह मुझे मारने की साजिश रची जा रही थी। आरटीआई कर्ता सद्दाम हुसैन ने आगे कहा की बीते बुधवार को करीब दोपहर 2 बजे उधवा हाई स्कूल के सामने चाय दुकान में चाय पी रहा था कि सेविका सबनम परवीन, सामनुर खातून,सगुप्ता परवीन, अंजुमआरा बेगम,संजोरा खातून, पुष्पा देवी एवं अन्य लगभग 70 सेविकाओं और 30 सेविकाओं के पति आकर मुझे कहने लगे कि तुम कौन होते हो आरटीआई करने वाला? तुम्हे किसने अधिकार दिया? मैंने कहा कि “आरटीआई अधिनियम 2005” जन जन का अधिकार है। इसी क्रम में सभी मिलकर गाली गलौज करते हुए कहा कि अगर आरटीआई आवेदन वापस नहीं लेगा तो जान से ही मार देंगे। इसी बीच कुछ सेविकाओं के पति ने सद्दाम हुसैन को मारने का आदेश दिया। वही आदेश मिलते ही सद्दाम हुसैन के साथ सेविकाओं ने जमकर मारपीट किए।आगे बताया कि हम सभी को चेहरा से जानते व पहचानने है देखने से पुलिस को बता सकते हैं। मारपीट के क्रम में सद्दाम हुसैन के पैंट के पॉकेट से अस्सी हजार रूपए एवं शर्ट के पॉकेट से बीस हजार रूपए अंजुमारा बेगम छीन लिया। उक्त पैसे जमीन विक्रेता को देना था। उन्होंने आगे बताया की मैं एक अधिवक्ता व राष्ट्रीय अध्यक्ष हूं मेरे साथ ऐसा गंदी घिनौना हरकत करके मेरे मान सम्मान को ठेस पहुंचाया है। मेरे पास साक्ष्य के रूप में सम्पूर्ण वीडियो रिकॉर्डिंग मौजूद है।