हजारीबाग। झारखंड राज्य में विस्थापित और प्रभावित के मामले बड़े पैमाने पर नजर आ रहे हैं। पिछले 21 वर्षों से केंद्र और राज्य सरकार विस्थापित और प्रभावित के आंदोलनों को दरकिनार करते आ रही है। उनके हक और अधिकार लौटाने के बजाय उन्हें और उनके परिवारों का बेघर करके शोषण किया जा रहा है जिसके खिलाफ आगामी 7 नवंबर 2021 को प्रदेश के राजधानी रांची में सात राजनीतिक दल राजभवन मार्च करेंगे। उक्त बातें हजारीबाग के पूर्व सांसद और सीपीआई नेता भुवनेश्वर प्रसाद मेहता ने पार्टी कार्यालय में आयोजित पत्रकार सम्मेलन में कहीं। उन्होंने कहा कि 7 मार्च को राजभवन के समक्ष सीपीआई, सीपीएम, माले, मासस राजद, कांग्रेस सहित अन्य झारखंड के 15 जन संगठन धरना प्रदर्शन करेंगे जिसके बाद राजभवन मार्च किया जाएगा। मेहता ने कहा कि राज्य सरकार विस्थापितों को न्याय दिलाने के लिए विस्थापन आयोग का गठन करें जिससे प्रभावितों को उचित रोजगार के बदले बेहतर मुआवजा मिल सके। 2012 से बंद गैरमजरूआ भूमि की रसीद को पुनः काटने के लिए सरकार आदेश दे। राज्य में अवैध तरीके से हजारों एकड़ बंदोबस्त भूमि की बंदोबस्ती रद्द किया जाए जिसकी जांच भी ससमय पूरा किया जाए। प्रदेश में चल रहे उद्योग धंधे में पुस्त दर पुस्त पोस्ट नौकरी का व्यवस्था किया जाए। जिससे उनका समुचित विकास हो सके।