बुधवार को अस्ताचल गामी सूर्य को दिया जाएगा पहला अर्घ।

नदी तालाबों की तट पर किया जाता है पर्व।

पाकुड़ । सनातन धर्म,संस्कृति में लोक पर्वों की महत्ता चिरकाल से रही है और सनातन पर्वों की श्रृंखला में,दीपावली के बाद अब नेम,निष्ठा,व लोक आस्था का महापर्व सूर्यषष्ठी की तैयारी, में जुट गए है। जिला मुख्यालय सहित, हिरणपुर, आमरापडा, महेशपुर , लिट्टीपाड़ा व पाकुड़िया प्रखण्ड के विभिन्न सुदूर ग्रामांचलों में पूरी लगनशीलता से की जाने लगी है।हालाकि,छठ का व्रत काफी कठिन है तथापि भगवान भास्कर के प्रति निष्ठा के कारण माताऐं पूरी लगनशीलता से पूर्ण करती आई हैं।छठ के अवसर पर,सूप,डाला से लेकर पूजन सामग्रियों की कीमतों में भारी उछाल के बावजूद,धार्मिक,आध्यात्मिक आस्था में कोई कमी नहीं दिख रही है।कहा जाता है,छठ का त्योहार अब विहार,उत्तरप्रदेश से निकल कर दिल्ली होते हुए विदेशों तक पहुंच गया।सनातन धर्म तथा हिन्दु संस्कृति पूर्णत मानवीयता पर आधारित हो,सम्पूर्ण विश्व को एक वृहद परिवार मानती रही है और सनातन परम्परा में जगत का कल्याण निहित एवम पर्वोंं की पृष्ठ भूमि में है,वैज्ञानिक तत्व जो सदैव लोक मंगल की कामना करती रही है।बहरहाल,छठ महापर्व की तैयारी में,घाटों की साफ सफाई,वहीं दुसरी ओर सूप डाला से लेकर कई विभिन्न प्रकार की पूजन सामग्रियों की खरीदारी भी,की जा रही है।कहते हैं,श्रावण माह से लेकर छठ एवम देव उठावनी एकादशी तक सनातन धर्म में अत्यधिक आध्यात्मिक महता बताई गई है।जिसे चतुर्मास कहते हैं इसी आध्यात्मिक महत्ता की विशिष्टता के कारण ही,सभी बड़े त्योहारों का आयोजन होता रहा है।छठ पर्व का समापन,सप्तमी गुरुवार को उगते भगवान भास्कर को अर्घ अर्पण करते हुए होगा।पर्व की पूनीत वेला में,छठ मैया की भक्ति पूर्ण लोक गीतों से पाकुड़िया के माहोल में भक्ति रस टपक रहा है जिसका रस्वादन जीवन में,मीठास घोल रहा है काश,इस रस का रिसाव ह्रदय में होता रहे तो हम में सम्भवत संवेदनशीलता में कमी नहीं होगी और हम एक दुसरे की पीड़ा हरण में सहयोग करने को तत्पर‌ रहते।और इसी संवेदनशीलता का आधार है आध्यात्म एवम मूल लक्ष्य है पर हित उधर छठ पूजा को लेकर जिला मुख्यालय सहित सभी प्रखंडो में तैयारी जोर सोर से किया जा रहा है।