कुडू/लोहरदगा l लोक आस्था का महापर्व छठ के चौथे दिन प्रखंड क्षेत्र में गुरूवार 11 नवम्बर को उगते हुए सूर्य को अर्ध्य अर्पित कर पारण के पश्चात् हर्षो उल्लास के साथ संपन्न हो गया। छठ को लेकर चार दिनों तक पुरा क्षेत्र भक्तिमय रहा। हर गली मोहल्लों से लेकर घाट तक छठ पूजा के गीत गूंजते रहे। पर्व के चौथे एवं अंतिम दिन पौ फटने से पूर्व कुडू के टीको, जिलिंग, बढ़की चापी, सलगी, जिमा, लावागाइ, रूद आदि विभिन्न घाटों और जलाशयों पर व्रती और उनके परिजन अपने अपने घरों से पूजा सामग्रियों के साथ बड़ी संख्या में व्रतधारी टीको सहित विभिन्न नदियों के तट और जलाशयों के किनारे पहुंचे और उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देकर भगवान भास्कर की पूजा-अर्चना की। व्रतियों ने आधे कमर पानी में खड़े होकर पूजा सामग्री से भरे सूप हाथों में लिए भगवान भास्कर को पूरी श्रधा के साथ दूसरा अर्ध्य दिया। दूसरा अर्ध्य देने के साथ ही उनका छात्तिस घंटे का निर्जला उपवास भी समाप्त हो गया। उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर इस महा अनुष्ठान का समापन हुआ। इसके बाद घाटों पर छठ माता को प्रणाम कर उनसे संतान-रक्षा का वरदान मांग कर लोगों ने प्रसाद बांट कर और फिर व्रतियों ने खुद भी प्रसाद खाकर व्रत खोला। इससे पूर्व महापर्व के दूसरे दिन छठ व्रतियों ने खरना अनुष्ठान किया और भगवान सूर्य की पूजा अर्चना के बाद खीर का प्रसाद ग्रहण किया। छठ व्रतियों द्वारा प्रसाद ग्रहण करने के बाद श्रद्धालुओं ने घर-घर जाकर खरना का प्रसाद ग्रहण किया। देर रात तक छठ व्रतियों के घरों में प्रसाद वितरण करने और खिलाने का दौर चलता रहा। ततपश्चात् बुधवार को छठ महापर्व का पहला अर्ध्य अस्ताचलगामी सूर्य को देने के लिए कुडू प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न घाटों पर श्रद्घालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। छठ को लेकर पुरे दिन छठ व्रती के परिजन खरीदारी में जुटे रहे। कुडू बस स्टैंड सहित अन्य स्थानों पर फल एवं पूजा सामग्रियों की दुकानो पर भीड़ लगी रही। वहीं महापर्व को सुरिक्षत व शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न कराने को लेकर कुडू पुलिस प्रशासन पूरी तरह चौकस नज़र आया। जहां थाना प्रभारी अनिल उरांव के निर्देश पर जगह-जगह पुलिस मुस्तैदी से निगरानी में लगी दिखी। वही थाना प्रभारी और बिडिओ मनोरंजन कुमार भी टीको छठ घाट पर मौजूद रहे। मौके पर गंगा प्रसाद, नविन कुमार टिंकू, सुदामा प्रसाद, संतोष प्रसाद, ओमप्रकाश भारती सहित श्रद्धालुओं की जबरदस्त भीड़ रही। इनमें महिलाएं, पुरुष और बच्चे सभी शामिल थे।