साहिबगंज। जातीय अस्मिता के नायक बिरसा मुंडा के जन्मदिन 15 नवंबर को “जनजातीय दिवस” मनाने का निर्णय केंद्र सरकार ने घोषित कर दिया है। इस मौके पर गिरी वनवासी कल्याण परिषद् ने केंद्र सरकार के इस निर्णय का स्वागत किया है।मौके पर गिरी बनवासी कल्याण परिषद् के नगर अध्यक्ष सह प्रांत कार्यकारिणी सदस्य डॉक्टर रणजीत कुमार सिंह ने बताया कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समाज का अमूल्य योगदान रह है, सैकड़ों जनजाति क्रांतिकारियों ने देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है। भगवान बिरसा मुंडा उन्हीं क्रांतिकारियों के अग्रणी रहे हैं। जल – जमीन और जंगल की रक्षा और अपने धर्म संस्कृति को बचाने के लिए संघर्ष करने वाले बिरसा मुंडा को जनजाति अस्मिता का नायक माना गया है, इसलिए उनके जीवनकाल से झारखंड के लोग उन्हें “धरती का आबा यानी भगवान” कहते थे। आजादी की लड़ाई में जनजातीय समाज के गौरवशाली योगदान को याद करने के लिए भगवान बिरसा मुंडा के जन्म दिन को जनजाति समाज और गिरि बनवासी कल्याण परिषद जनजाति गौरव दिवस के रूप में कई वर्षों से मनाता आ रहा है। इसके माध्यम से जनजातीय समाज अपनी अस्मिता, स्वाभिमान और पहचान खोज रहा था, ऐसे में केंद्र सरकार के इस निर्णय का हार्दिक स्वागत है। आगे उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा तो जनजातीय अस्मिता के प्रतीक थे ही, लेकिन उन्होंने केवल जनजातीय समाज के लिए ही नहीं, बल्कि संपूर्ण देश की आजादी के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया था। सरकार का यह निर्णय न केवल बिरसा मुंडा बल्कि सिद्धो – कान्हु, तिलकामांझी, तत्यां भील, राधोजी भांगरे, तलकक्ल चंदू, वीर रघुनाथ मंडलोई, तीर्थ सिंह और रानी मां गाईदिनल्यू जैसे जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को भी मान्यता देता है।
बता दें कि इस वर्ष देश जब आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है, तो इस घोषणा का महत्व और भी बढ़ जाता है। अतः भगवान बिरसा मुंडा और अन्य बलिदानों को याद करते हुए न केवल जनजातीय समाज बल्कि संपूर्ण देश 15 नवंबर का दिन जनजाति गौरव दिवस के रूप में धूमधाम से मनाया जाएगा। इसके अलावा राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री जनजातीय सुरक्षा मंच के डॉक्टर राजकिशोर हांसदा, प्रांत सह संगठन मंत्री कैलाश उरांव, जिला संगठन मंत्री विजय टुडू सहित गिरि वनवासी कल्याण परिषद परिवार ने भी इस ऐतिहासिक निर्णय का स्वागत किया है।