झारखंड सरकार पी0 पेसा संसदीय कानून एक्ट 1996 जल्द लागू करें:- शिवचरण मलतो ,पहाड़ीया नेता लिट्टीपाड़ा।

सुंदरपहाड़ी ( गोड्डा ) । लिट्टीपाड़ा विधानसभा के लोकप्रिय पहाड़ीया नेता शिवचरण मलतो ने बताया गया कि मांझी परगना सरदार सभा की एक दिवसीय विशाल धरना प्रदर्शन का आयोजन किया गया।जिसमें महामहिम राज्यपाल के नाम से 15 सुत्रों माँगों को लेकर प्रखंड विकास पदाधिकारी को कार्यक्रम के मध्यम से ज्ञापन सौंपा गया।झारखंड राज्य के 15 अनुसूचित क्षेत्रों अनुच्छेद 243 (1)संसदीय कानून एक्ट 1996 लागू करने के लिए जोरदार माँग रखी गई।प्रवाधनों के अनुरूप नियम वाली बनाने की प्रक्रिया पुरी होने तक झारखंड राज्य पंचायत चुनाव की अधिसूचना पर रोक लगाने की आवाज उठायी गई।इस मांझी परगना सरदार सभा कार्यक्रम में निम्नलिखित बिंदुओं पर महामहिम राज्यपाल ध्यान को आकृष्ट करा गया।

1.झारखंड में 12 जिले 3 प्रखंड व 2 पंचायतों अनुसूचित क्षेत्रों के रूप में दिनांक 11 अप्रैल साल 2007 को घोषित किया गया।

2.भारत के संविधान अनुच्छेद 243( एम)4 बी के तहत मनानीय संसद ने अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों को प्रशासन नियंत्रण के लिए पी0पेसा कानून एक्ट 1996 को परित किया है।जिस पर महामहिम राष्ट्रपति महोदय जी ने 24 दिसंबर 1996 को अपनी लिखित सहमति दी है।

3.उपयुर्क्त संसदीय कानून 1996 के द्वारा अनुसूचित क्षेत्रों मे अनूसूचित जनजातियों के लिए कुल 23 प्रवाधनों को आपदाओं व उपतरणों के अधीन विस्तार किए गए हैं।जिसकी धारा 3,4,4 (ओ),4 (एम) धारा 5 पाँच के अनुपलन मे क्रमशः स्वशासी जिला परिषद/क्षेत्रीय परिषद,तथा आदिवासी विशेष ग्राम सभा का स्पष्ट दिए गए हैं।जिसका झारखंड पंचायत राज अधिनियम 2001 के प्रवाधनों मे शामिल नहीं किया गया है।जो भारत की संविधान का उल्लंघन प्रतीत होता है।

4.अधिनियम 1996 की धारा 4 मे साफ लिखा हुआ है कि संविधान के भाग -9 मे सभी बतों के होते हुए भी राज्य विधान मंडल उपयुर्क्त कानून के प्रवाधनों की विपरीत कोई भी कानून नहीं बनाएगा।पुनः धारा 5 अधिनियम 1996 मे स्पष्ट लिखा हुआ है कि संशोधन करने के लिए समय सीमा दिनांक 24 दिसंबर से एक साल की अवधि रखी गई है।इस प्रकार उक्त अवधि के बाद से इसके सभी प्रवाधनों को अनुसूचित क्षेत्रों में स्वतः लागू हो गए।

5.झारखंड पंचायत राज अधिनियम 2001 मे वर्णित धारा 10(8) व 10 (9) को देखने से स्पष्ट हो जाता है।कि राज्य सरकार अनुसूचित क्षेत्रों में अपने संविधान हितों रक्षार्थ ग्राम सभा को निर्णय लेने से रोकती है।जो ध्यान देने वाले केंद्र बिंदु है।