हजारीबाग । जिला कांग्रेस कार्यालय कृष्ण बल्लभ आश्रम में भारत के प्रथम प्रधान मंत्री की 132 वीं जयंती मनाई गई । कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जिला अध्यक्ष अवधेश कुमार सिंह नें कहा कि देश की करोड़ो जनता का हृदय सम्राट प्रथम प्रधान मंत्री।पंडित जवाहरलाल नेहरू नें ऐशोआराम की जिन्दगी न अपनाते हुए स्वाधीनता के लिए गांधीजी के साथ जूझना स्वीकार किया । मोतीलाल नेहरू गांधीजी से कहकर उन्हें रोकना चाहते थे पर पंडित जवाहरलाल नेहरू को फुलों की सेज नही कठोर कारावास की कड़ी जमीन देश के लिए अधिक उपयुक्त लगी । प्रिय पत्नी का देहांत होने पर भी मन को कठोर कर नेहरू सत्याग्रह के आंदोलन में कुद पड़े । कांग्रेस का अध्यक्ष पद अपने पिता के बाद स्वयं स्वीकार कर पूर्ण स्वराज्य की शपथ ली और स्वाधीन देश के प्रथम प्रधान मंत्री बनने के बाद देश को विश्व के चोटी के राष्ट्रों के मध्य ले जाकर प्रतिष्ठित किया । देश के चहुंमुखी विकास के लिए वे प्रयत्नशील रहे । विश्वशांति के लिए भी अद्वितीय कार्य कर नाम कमाया । वे 1955 में भारत रत्न से सम्मानित किए गए ।