रामगढ़ ( गोला ) । पिछ्ले दो दिनों में हो रही बारिश के कारण रामगढ़ जिला में धान की कटाई में लगे हुए किसान काफी परेशान हैं। इस सम्बंध में कृषि विज्ञान केंद्र,मांडू( रामगढ़) से मिली जानकारी के अनुसार यह वर्षा दक्षिण-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी में एक निम्न दबाव के क्षेत्र के कारण हो रही थी। कृषि विज्ञान केंद्र के ग्रामीण कृषि मौसम सेवा विभाग से पता चला कि कल यानी 15 नवंबर से वर्षा में कमी आएगी परन्तु आसमान से बादल छंटने में एक दिन का समय और लग सकता है, संभवतः 17 नवंबर से आसमान साफ हो जाएगा।
इस विषय पर ग्रा०कृ०मौ०से० के नोडल पदाधिकारी डॉ० दुष्यंत कु० राघव ने किसानों को सलाह दी है कि वे मौसम साफ होने के बाद जल्द से जल्द अपने खेतों से धान की फसल की कटाई समाप्त करें तथा मिट्टी में मौजूद नमी का लाभ लेकर खेतों की अविलंब जुताई कर दें। और इन खेतों में गेहूँ, चना, तीसी, सरसों/तोरी की खेती करें। उन्होने किसानों को जानकारी दी कि जिन खेतों में पानी जमा है वहाँ कटाई के बाद मेढों को काट कर खेतों से पानी निकाल दें और गेहूँ/चना के बीज 30 की०ग्रा०/एकड़ की दर से छींट दें, बीज छींटने से पहले बीज को गोबर और पानी के घोल का लेप लगा कर सुखा लें। जो किसान आलू की बुआई करने जा रहे हैं वो बीज की बुआई से पहले बीज को अंत्रकोल (प्रोपिनेब) 70%WP से 2 ग्रा०/की०ग्रा० बीज की दर से उपचारित करने के बाद बुआई करें। तथा रबी की अन्य फसल जैसे मटर, चना, सरसों, गेहूँ आदि के बीज को भी बाविसटीन (कारबँडाजिम) से उपचारित करने के बाद ही बुआई करें।
इस वर्ष मानसून में भी काफी अधिक बारिश हुई है और इस वर्षा के बाद वातावरण में फिर से नमी बढ़ गई है। इस कारण से भंडार घर में कीटाणुओं की संख्या में अत्यधिक वृद्धि हो जाती है। किसानों के लिए आवश्यक सुझाव है कि वो मौसम साफ होते ही कटाई करने के बाद फसल को 2-3 दिनों तक खेत में सुखा कर गहाई करें, तथा दानों को भी चटक धूप निकलने के बाद अच्छी तरह सुखा लें तथा भंडारण करने से पहले भंडार घर की अच्छी तरह सफाई कर के कीटाणु रहित करने के लिए नुवान (डाईक्लोरवास 76% EC) का 2 मि०ली०/ ली० पानी में मिलाकर छिड़काव करें ताकि फसलों को कीटाणु रहित एवं जिवाणु रहित कर सुरक्षित भंडारण किया जा सके ।