हज़ारीबाग़ । जुल्लू पार्क स्थित मेहता कुशवाहा भवन में हक़ की लड़ाई पुस्तक का विमोचन किया गया। विमोचन कार्यक्रम की अध्यक्षता समाजसेवी डॉ हीरालाल साहा जबकि संचालन डॉ भुनेश्वर महतो ने किया। डॉ साहा ने अपने सम्बोधन में कहा कि हक़ की लड़ाई पुस्तक के लेखक जयनारायण प्रसाद मेहता ने बहुत ही चिंतन करने के पश्चात ही इसे मूर्त रूप दिया है। उन्होंने कहा कि यदि झरखण्ड में स्थानीयों को शिक्षा और स्वास्थ्य दोनो को अनिवार्य कर दिया जाय तो राज्य की तस्वीर बदल जाएगी।
क्योंकि सिर्फ अमीर के बच्चे ही मेधावी और प्रतिभावान नही होते बल्कि गरीब अमीर घर के अपेक्षा गरीब परिवार में जन्म लिए बच्चे काफी मेहनती और प्रतिभावान होते हैं। जबकि आर्थिक संकट के कारण वे डॉक्टर, इंजीनियर, आईएएस और आईपीएस तक नही पहुंच पाते हैं। यहां की सरकार यदि स्थानीय लोगो के लिए पॉलिसी बनाती तो आज झरखण्ड की तस्वीर ही बदल जाती। विशिष्ट अतिथि बटेश्वर मेहता ने कहा कि झरखण्ड में सरकार आज तक स्थानीय नीति नही बना सकी। जिसके कारण आज तक स्थानीय लोगो को अपना हक नही मिल रहा है। लेखक जयनारायण प्रसाद मेहता ने अपने संबोधन में भावुक स्वर में कहा कि झरखण्ड अलग राज्य के लिए हमलोगों ने कई आंदोलन किया। झारखंडियों के संघर्ष और कुर्बानी के बाद झरखण्ड राज्य मिला पर अधिकार नही मिला। जिस मक़सद से झरखण्ड का निर्माण किया गया। उसका मकसद तब पूरा नही हुवा। चुकी सरकार आज तक स्थानीय नीति नही बना पाई। उन्होंने कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हज़ारीबाग़ के पूर्व सांसद भुनेश्वर प्रसाद मेहता की उपस्थिति नही होने पर उनके द्वारा भेजा गया सन्देश को पढा।पूर्व सांसद ने अपने सन्देश में लिखा था कि हक़ की लड़ाई पुस्तक बहुत परिश्रम करने के बाद लिखा गया है। पुस्तक जन जन तक पहुंचे और स्थानीयों को अपना अधिकार लेने के लिए आंदोलन तेज करना होगा।