छोटे-छोटे दो बच्चे हुए अनाथ।

दुमका ( शिकारीपाड़ा ) । कोविड महामारी से बचाव के लिए सरकार के द्वारा टीकाकरण अभियान जोर-शोर से चलाया जा रहा है और प्रतिदिन टीकों की संख्या में बढ़ोतरी को देख कर सरकार अपनी पीठ थपथपा रही है परंतु टीकाकरण के लिए मूल रूप से जिम्मेदार स्वास्थ्य विभाग टीकाकरण में घोर लापरवाही बरत रहा है ।
ताजा मामला शिकारीपाड़ा थाना क्षेत्र के कोलायबाड़ी गांव का है । ज्योतिन मुर्मू पिता बुदिन मुर्मू, ने प्रखंड विकास पदाधिकारी शिकारीपाड़ा को आवेदन देकर कहा है कि उसकी पत्नी दुलड़ हेंब्रम उम्र लगभग 26 वर्ष 17 नवंबर कोलाई बाड़ी सीएसपी में पैसे निकालने के लिए गई थी जहां बगल में ही टीकाकरण किया जा रहा था। टीकाकरण कर्मियों ने जबरन बुलाकर दुलड हेंब्रम को कोविड-19 का पहला डोज दे दिया जबकि दुलाड हेमरोम लगभग 8 माह की गर्भवती थी। विचारणीय प्रश्न यह है कि 8 माह की गर्भवती महिला को देख कर भी स्वास्थ्य कर्मियों ने नजरें बंद कर क्यों टीकाकरण किया। साथ ही आंगनवाड़ी सेविका , पोषण सखी सहिया आदि सहायक कर्मी जिन्हें गांव की प्रत्येक महिला एवं घर-घर की जानकारी रहती है उन्होंने अपने कर्तव्य का निर्वहन नहीं किया वरना एक निर्दोष की जान बच सकती थी । आंगनबाड़ी केंद्र के द्वारा निर्गत जच्चा-बच्चा रक्षा कार्ड में दुलाड़ हेमरोम की जचगी की संभावित तिथि जनवरी 2022 दर्शाई गई है और दूलड़ हेंब्रम ने समय-समय पर केंद्र में जाकर आवश्यक जांच एवं इंजेक्शन भी ली थी। स्वास्थ्य कर्मियों की इतनी बड़ी लापरवाही के कारण दुलाड हेंब्रम को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। दुलाड हेमरोम अपने पीछे 5 वर्ष एवं ढाई वर्ष की दो बच्चों को छोड़ गई है । मृतिका के पति ने बताया कि टीका लेने के बाद रात से ही उसकी तबीयत बहुत खराब हो गई जिसे शिकारीपाड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया जहां से बेहतर इलाज के लिए उसे दुमका सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया । जहां इलाज के क्रम में 18 नवंबर को उसकी मौत हो गई । यहां एक प्रश्न यह भी उठता है कि जब गर्भवती महिला की कोविड के टीके से मौत की संभावना बन गई थी तो मृत्यु के पश्चात क्यों नहीं उसका पोस्टमार्टम किया गया । मृतका के पति ने बताया कि मृत्यु होने के तुरंत बाद ही हॉस्पिटल कर्मियों के द्वारा उसे जल्द से जल्द बॉडी को ले जाने का दबाव दिया गया। ज्योति मुर्मू ने लापरवाह एवं दोषी कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई करने तथा मुआवजा देने की मांग की है। हालांकि इस संबंध में चिकित्सा पदाधिकारी शिकारीपाड़ा से संपर्क नहीं हो सका, जबकि प्रखंड विकास पदाधिकारी शिकारीपाड़ा ने कहा कि यह जांच का विषय है । जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है या कोई कार्रवाई हो सकती है।

स्वास्थ्य कर्मियों की इतनी बड़ी लापरवाही पर अब देखना है कि विभाग क्या कार्रवाई करती है ताकि लोगों का भरोसा टीका एवं स्वास्थ्य विभाग पर बना रहे।