बड़कागांव । प्रखंड के चेपाकला पंचायत के पंदनवाटांड़ आज भी मूलभूत आवश्यकताओं से वंचित है। आजादी के 74 साल गुजर गए, लेकिन विकास की एक भी धारा इस गांव में नहीं बहा है। चुनाव के दिनों में जनप्रतिनिधि बड़े-बड़े वादे करके जाते हैं, परंतु चुनाव जीतने के बाद अपने वादे भूल जाते हैं। पंदनवाटांड़ में लगभग 40 घर के लोग निवास करते हैं यहां की आबादी लगभग 175 से भी ज्यादा हैं। एक प्राथमिक विद्यालय बच्चों के लिए है जो लॉकडाउन के कारण प्रभावित है। चेपाकला पंचायत भवन से इस गांव के साथ संपर्क साधने के लिए पगडंडियों का सहारा लेना पड़ता है। सड़के इतनी खराब की एक मोटरसाइकिल भी इस गांव तक नहीं ले जाया जा सकता है। ग्रामीणों को इलाज कराने के लिए लगभग 15 किलोमीटर की यात्रा तय कर बड़कागांव आना पड़ता है। बीमारी के कारण ज्यादा स्थिति खराब होने पर बीमार व्यक्ति को खटोला में लादकर मुख्य मार्ग तक कंधे में उठा कर लाया जाता है। पंदनवाटांड़ के लिए बिजली एक सपने के समान है। इस गांव में आज तक किसी के घर में टीवी या रेडियो तक नहीं है। लोग सोलर प्लेट का सहारा लेकर मोबाइल चार्ज करते हैं। गांव की गलियों में एक भी सोलर लाइट देखने को नहीं मिला। रात होते ही इस गांव को अंधेरा अपने आगोश में ले लेता है। घरों को प्रकाशित करने के लिए किरासन तेल का प्रयोग कर डिबरी या लकड़ियों को जलाकर करते हैं। चारों ओर जंगल से गिरे होने के कारण हाथियों का तांडव का भय हमेशा बना रहता है। हाथी की भय से शाम होते ही लोग अपने-अपने घर में दुबक जाते हैं। गिने चुने लोगों को ही वृद्धा पेंशन एवं प्रधानमंत्री आवास मिला है। लोगों का मुख्य व्यवसाय खेती-बाड़ी, मजदूरी या जंगल से सूखी लकड़ियों को इकट्ठा कर बड़कागांव या हजारीबाग के बाजारों में बेचकर अपना जीवन यापन करना है। मामले को लेकर बीडीओ जितेंद्र कुमार पांडे से पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि पंदनवाटांड़ गांव का वस्तु स्थिति मेरे संज्ञान में नहीं है जल्द ही एक टीम बनाकर लोगों की समस्या सुनने के लिए मैं पंदनवाटांड़ भेजूंगा। चेपाकला पंचायत के पंचायत समिति सदस्य प्रतिनिधि राजेश रजक ने कहा कि बिजली विभाग के आला अधिकारियों से बात हो चुकी है बहुत जल्द बिजली के खंभे लगाकर पंदनवाटांड़ में बिजली पहुंचाया जाएगा।
बड़कागांव सवददाता राजेश कुमार की रिपोर्ट।