लोहरदगा/कुडू l कहते हैं कोई भी फसल जब पककर तैयार होती है तो उसे देखकर किसान का सीना चौड़ा हो जाता है। क्योंकि, यह उसकी मेहनत का नतीजा होता है, और इसी नतीजे के आधार पर उसका घर-परिवार, उसका जीवन आगे बढ़ता है। खेती से ही साल भर के लिए परिवार की जरूरतें पूरी करने वाले इन किसानो के लिए कभी-कभी खेत में लहलहाने के बावजूद भी फसल मुसीबत का सबब भी बन जाती है। कुडू प्रखंड में इस बार मटर की अच्छी पैदावार भी हुई है। शहरों में मटर महंगे दामों में बेची जा रही है लेकिन किसानों को उनकी फसल का वाजिब दाम नहीं मिल पा रहा है। ये कहना है कुडू प्रखंड क्षेत्र के बड़की चापी पंचायत अंतर्गत पहाड़ी व दुर्गम क्षेत्र के दुबांग नवाटोली में बड़े पैमाने पर मटर का उत्पादन करने वाले किसान विनोद मुंडा का। विनोद मुंडा ने बताया कि इस बार उन्होंने 5 एकड़ में मटर की फसल लगाई। कड़ी मेहनत और महंगी लागत से लगभग तिन – माह माह दिन रात एक कर मटर का उत्पादन किया। लेकिन अब कम रेट मिलने से खेती पर किया हुआ खर्चा भी पूरा नहीं हो रहा है। इसके चलते उन्हें आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। फिलहाल खुदरा बाज़ारों में दाम आसमान पर हैं, लेकिन किसानों को इसका फायदा नहीं मिल रहा। मोटा मुनाफा सिर्फ बिचौलिए ही कमा रहे हैं। ऐसे में किसान काफी मायूस हैं।

फिलहाल किसानो 25 से 27 रु में मटर खरीद रहे व्यापारी

बाज़ारों में तो मटर 50 से 60 रुपए किलो बिक रहे हैं लेकिन किसानों से 25 से 27 रुपए किलो के हिसाब से मटर खरीदे जा रहे हैं, जिससे किसान मायूस हैं। मटर की फसल उगाने वाले किसान विनोद मुंडा, संतोष उरांव, प्रेम उरांव, शतिश उरांव आदि का कहना है कि इस बार मेहनत वसूल नहीं हो पा रही है। मंडियों में तो मटर महंगे दामों में बिक रहे हैं लेकिन उनसे काफी कम दाम में मटर खरीदकर बिचौलिये अपनी जेब भर रहे हैं।