हजारीबाग। पूर्व सांसद भुनेश्वर प्रसाद मेहता ने फूड कॉरपोरेशन लिमिटेड ऑफ इंडिया के सहायक महाप्रबंधक (एजीएम)और जिला खाद्य आपूर्ति पदाधिकारी पर गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि जिले में संचालित दर्जनों जन वितरण प्रणाली के दुकानदारों से दोनों पदाधिकारियों ने कोरोना आपदा जैसे वैश्विक महामारी में वसूली का कार्य किया है, जिसमें एफसीआई के एजीएम और खाद्य आपूर्ति पदाधिकारी की मिलीभगत से मार्केटिंग पदाधिकारी के माध्यम से हुआ है। वर्ष 2021 के सितंबर माह में हजारीबाग जिले सहित अन्य जिले जहां हजारीबाग के फूड कॉरपोरेशन लिमिटेड ऑफ इंडिया स्थित भंडार से सभी जन वितरण प्रणाली के दुकानों को राशन की आपूर्ति की जाती है। उस आपूर्ति को पूरी तरह से सितंबर माह में रोक दिया गया था जिसका राशन एफसीआई के एजीएम और जिला खाद्य आपूर्ति पदाधिकारी मार्केटिंग ऑफिसर के सहयोग से जिले के अन्य बाजारों में करोड़ों रुपए के मुनाफे पर बेच दिया गया। उन्होंने कहा है कि केंद्र सरकार से मिले गरीबों को राशन का बंदरबांट कोरोना आपदा वैश्विक महामारी को उक्त दोनों तीनों पदाधिकारियों ने और अवसर में तब्दील कर दिया और मोटे रकम की कमाई कर ली। जब से कोविड -19 ने झारखंड में पांव पसारा है तब से प्रति व्यक्ति अनाज वितरण का मुहिम चलाया गया था जिस पर कई काले धब्बे लगे हुए हैं। गरीबों को 5 किलो अनाज के बदले 4 किलो अनाज और 10 किलो अनाज के बदले 8 किलो अनाज की आपूर्ति की गई। 2 किलो शेष अनाज पदाधिकारी के खाते में चले जाते हैं जिससे उनकी कॉलर मजबूत होती है। मामले को लेकर पूर्व सांसद बीपी मेहता ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है। पत्र में कहा है कि मुख्यमंत्री राज्य स्तरीय टीम गठित कर सभी जिलों में एफसीआई, खाद्य आपूर्ति पदाधिकारी, मार्केटिंग पदाधिकारी सहित जन वितरण प्रणाली के दुकानों की जांच कराएं, जिससे आपदा को अवसर में बदलने वाले लोगों को सजा मिल सके।