हजारीबाग । आरोग्यम सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल में कैथलैब की सुविधा शुरू होने के साथ ही यहां जाने – माने कार्डियोलॉजिस्ट डॉ.मृणाल कुंज अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनकी सेवा हजारीबाग जैसे छोटे शहर के लिए वरदान साबित हो रही है। बीते दिनों कोडरमा जिले के चंदवारा थाना अंतर्गत बाराडीह निवासी मोहम्मद अब्दुल गाफ्फुल के पुत्र अबू शायेद को हार्ट में असहनीय दर्द, सूजन और लगातार उल्टी होने के साथ पूरी तरह शॉक की अवस्था में हॉप हॉस्पिटल, तिलैया से आरोग्यम रेफर किया गया। मरीज के परिजनों ने जब इसे आरोग्यम हॉस्पिटल लाया तो यहां शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ.ललित गुप्ता ने देखा और तुरंत हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. मृणाल कुंज से संपर्क किया। डॉ.मृणाल कुंज ने मरीज को अपने अंदर एडमिट करके पहले एक्स-रे किया, जिसमें स्पष्ट कारण का पता नहीं चलने पर मरीज का ईसीजी कराया तो परिकार्डियटिस के लक्षण पाए गए। कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. मृणाल कुंज और शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. ललित गुप्ता ने बिना कोई देरी की है इको गाइडेड पेरिकार्डियोसेंटेसिस किया और मरीज के हार्ट के पेरिकार्डियम रीजन में जमें खून के थक्के को तोड़कर करीब 150 एमएल हेमरेजिक फ्ल्यूड को बाहर निकाला। हेमरेजिक फ्ल्यूड निकलने के बाद कुछ ही घंटे में मरीज को असहनीय दर्द और हो रहे लगातार उल्टी से राहत मिली। इस तरह आरोग्यम सुपरस्पेशेलिटी हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. मृणाल कुंज और शिशु रोग विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ.ललित गुप्ता के सूझबूझ और कुशल अनुभव चिकित्सीय प्रबंधन ने इस मरीज को एक नई जिंदगी दी। डॉ. ललित गुप्ता ने बताया कि मेरे करियर का इस प्रकार का यह पहला केस था जिसे कार्डियोलॉजिस्ट डॉ.मृणाल कुंज के देखरेख में हमलोगों ने सफलतापूर्वक स्वास्थ्य कर पाया। कार्डियोलॉजिस्ट डॉ.मृणाल कुंज ने बताया की अगर मरीज के इलाज देरी होती तो मरीज शॉक में तो था ही आगे जाकर इसका हार्ट फेल भी हो सकता था और जान भी जा सकती थी। उन्होंने यह भी बताया कि मरीज की हॉस्पिटल से छुट्टी हो गई है और अब पूरी तरह स्वास्थ्य है ।

आरोग्यम सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल के निदेशक हर्ष अजमेरा ने बताया कि हजारीबाग में स्वास्थ्य के क्षेत्र में यह पहला मौका था जब हार्ट के पेरिकार्डियम रीजन में जब में खून के थक्के को निकालकर एक बच्चे को नई जिंदगी हमारे हॉस्पिटल के चिकित्सकों के कार्यकुशलता से मिली। उन्होंने बताया कि अमूमन इस प्रकार का केस बड़े शहरों में ही होता है और मरीज के परिजन को बड़ा राशि खर्च करने के साथ परेशानियों का सामना करना पड़ता है लेकिन हजारीबाग में हमने यह कार्य सिर्फ़ 15 हजार के पैकेज में करके मरीज के परिजन को राहत देने का प्रयास किया और एक संदेश भी दिया है कि कैथ लैब की सुविधा भी हम इसी प्रकार राहत भरी दरों में लोगों को उपलब्ध कराएंगे ।