बगैर निबंधन संचालित हैं कई पैथोलॉजी लैब

गिरिडीह। जिले में पैथोलॉजी लैब के नाम पर सरेआम नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है. जिले में लगभग 226 पैथोलॉजी लैब है, लेकिन महज 64 का ही निबंधन है. जिला मुख्यालय में 26 और विभिन्न प्रखंडों में 200 से ज़्यादा लैब चल रहे हैं. खून और मल-मूत्र जांचने की प्रक्रिया सीखकर कोई भी पैथोलॉजी लैब खोल ले रहा है. राज्य सरकार के निर्देश पर सिविल सर्जन ने पैथोलॉजी लैबों को खंगालना शुरू कर दिया है. कुछ दिन पूर्व कुछ पैथोलॉजी लैबों की जांच हुई थी. जांच के दौरान निम्न क्वालिटी की किट और दवा पकड़ी गई थी.

क्या है प्रावधान

पैथोलॉजी लैब खोलने से पूर्व क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत निबंधन कराना जरूरी है. लैब के संचालन के लिए एमडी पैथोलॉजी की डिग्री जरूरी है. जिले के अधिकतर लैब न तो निबंधित हैं और न ही यहां एमडी पैथोलॉजिस्ट है.

डीएमएलटी का क्या है काम

सभी पैथोलॉजिकल लैब में डीएमएलटी (डिप्लोमा इन मेडिकल लैब टेक्नीशियन) होते हैं. डीएमएलटी डिग्री धारक लैब में सहायक के रूप में काम कर सकते हैं. आलम यह है कि डीएमएलटी डिग्री धारी खुद को डॉक्टर मान बैठे हैं. यही कारण है कि अधिकतर निजी लैब की जांच में 80% मलेरिया रिपोर्ट पॉजिटिव बताई जाती है, जबकि सदर अस्पताल में यह प्रतिशत 10 से 15 ही रहती है.

निबंधन के लिए पैथोलॉजिकल लैबों को भेजा नोटिस

सिविल सर्जन डॉ. एसपी मिश्रा ने पैथोलॉजिकल लैबों को निबंधन के लिए नोटिस भेजा है. निबंधन के बाद इस बात की जांच की जाएगी कि किस जांच घर में एमडी पैथोलॉजिस्ट बैठते हैं. डीएमएलटी डिग्री धारक सहायक के रूप में काम कर सकते हैं. एमडी पैथोलॉजिस्ट ही जांच रिपोर्ट में हस्ताक्षर करते हैं.

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