दृष्टि बाधितों के सपने साकार करने में जुटा साइट सेवर्स

हजारीबाग। इंसान के मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा और समर्पण हो, तो कोई काम असंभव नहीं होता. मुश्किल भरी राह भी आसान हो जाती है. यह पंक्तियां हजारीबाग की उन दृष्टि बाधित विद्यार्थियों पर चरितार्थ हो रही हैं, जो खुद को दिव्यांग नहीं, सामान्य इंसान ही समझते हैं. ये ऐसे विद्यार्थी हैं, तो भागमभाग जिंदगी में खुद को स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे विद्यार्थी, जो इस खूबसूरत दुनिया को न देख पा रहे और न ही इसका आनंद उठा पा रहे. बस अनुभव और स्पर्श से कोरी कल्पना से संसार की हर गतिविधियों से वाकिफ हो रहे हैं. इन विद्यार्थियों ने ठान लिया है कि अब उन लोगों को भी सामान्य लोगों की तरह काम करना है और अपना करियर बना भविष्य गढ़ना है.

हजारीबाग के लगभग 15 दृष्टिहीन छात्र-छात्राएं कल्पनाओं की ऊंची उड़ान भरने के लिए तैयार हो रहे हैं. उनकी कल्पनाओं को पंख देने में जुटा है साइट सेवर्स. इन दिनों समग्र शिक्षा अभियान, साइट सेवर्स एवं झारखंड शिक्षा परियोजना के माध्यम से कंप्यूटर की ट्रेनिंग दी जा रही है. इन दिनों सभी छात्र-छात्राएं कंप्यूटर पर काम करती भी दिख रही हैं. छात्राओं का कहना है कि वे लोग देख नहीं पाते हैं. इसलिए टॉकिंग सॉफ्टवेयर के जरिए वे लोग काम करते हैं. टॉकिंग सॉफ्टवेयर स्क्रीन रिकॉर्डर उन्हें मदद करता है. इससे वे लोग भी अन्य छात्र-छात्राओं की तरह कंप्यूटर पर काम कर पाते हैं.

वर्तमान समय में वर्ड पावर, इंटरनेट एक्सेस पर वे लोग काम कर रहे हैं. इंफोर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी का प्रशिक्षण मोबाइल एवं कंप्यूटर की जानकारी उन्हें दी जा रही है. इनमें से पांच छात्राएं जो अच्छी ट्रेनिंग पाएंगी, उन्हें पांच लैपटॉप और पांच स्मार्ट फोन भी दिया जाएगा. छात्राएं कहती हैं कि वे लोग अन्य बच्चों से अलग हैं. उन लोगों को पढ़ने का तो शौक है, लेकिन सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाती है. ब्रेल लिपि में वे लोग पढ़ते हैं या फिर टॉकिंग सॉफ्टवेयर के जरिए उन्हें जानकारी मिलती है. लेकिन अब लैपटॉप पर वे लोग ट्रेनिंग ले रही हैं. इससे वे लोग अपना नोट्स भी बना पाएंगे और लिख भी पाएंगे. इससे परीक्षा देने में उनलोगों को आसानी होगी.

क्या कहते हैं प्रशिक्षक

साइट सेवर्स के पदाधिकारी सह प्रशिक्षक सफजीत सिंह बताते हैं कि उनलोगों का उद्देश्य दृष्टिबाधित बच्चों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना उद्देश्य है. छात्राएं स्पेशल हैं. इस कारण उनलोगों को भी इन पर विशेष ध्यान देना होता है. छात्राएं किताब नहीं पढ़ पाती हैं. छात्र-छात्राओं को टेक्नोलॉजीयुक्त शिक्षा देने से उनकी समस्याओं का समाधान हो सकता है, ऐसे में वे लोग कोशिश कर रहे हैं कि दृष्टिबाधित छात्र-छात्राओं को उस लायक बनाएं, जिससे वे प्रतियोगी परीक्षाओं में भी सफल हो सकें.

छात्रा कांति कुमारी भी यहां ट्रेनिंग पा रही है. कांति कुमारी बताती है कि उसने मैट्रिक परीक्षा प्रथम स्थान से पास किया और इस वर्ष इंटरमीडिएट भी 70% अंक लाकर प्रथम स्थान से पास किया है. वह शिक्षक बनना चाहती है. उसका कहना है कि इस तरह की ट्रेनिंग से उनलोगों को बड़ा फायदा है, क्योंकि वह किताब तो पढ़ नहीं सकती है. टॉकिंग सॉफ्टवेयर के जरिए वे लोग नोट्स बनाती हैं और फिर उसे सुनती है. इससे उसे याद हो जाती है. इस कारण ट्रेनिंग उनलोगों के लिए बेहतर है. अब उन्हें यह विश्वास भी हो रहा है कि वह अपने पैरों पर खड़ी हो पाएगी. बहरहाल ये छात्राएं आज आत्मविश्वास से ओतप्रोत हैं. जिन छात्राओं को कुदरत की सुंदर सृष्टि दिख भी नहीं पाती है, वे अब ज्ञान के सागर में डुबकी लगाकर खूबसूरती को महसूस अवश्य कर रहे हैं .जरूरत है ऐसी छात्र-छात्राओं को प्रोत्साहित करने की.

Share this...
Share on Facebook
Facebook
Tweet about this on Twitter
Twitter

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *