चार साल के बाद भी धूल फांक रही अर्बन हाट योजना

धनबाद। महानगरों की तर्ज पर धनबाद में अर्बन हाट बनाने की योजना निगम के दफ्तर में धूल फांक रही है. इस योजना के लिये निगम जमीन नहीं ढूंढ पाया है. योजना का नाम सुन कर निगम के अधिकारी बगलें झांकने लगते हैं. शनिवार 23 जुलाई को सहायक नगर आयुक्त प्रकाश कुमार से पूछा गया कि अर्बन हाट के निर्माण को लेकर निगम में क्या तैयारी चल रही है. सवाल सुनते ही वह चौंक गए. कहने लगे अर्बन हाट को लेकर जमीन कहां मिली है. नगर विकास के सचिव कई बार निगम को जमीन उपलब्ध कराने के लिये लेटर दे चुके हैं. हम भी अपने स्तर पर जमीन की मांग कर चुके हैं. लेकिन जमीन मिल कहां रही है. जमीन के कारण कई सारी योजना लटकी हुई है.

क्या है अर्बन हाट योजना?

यह भारत सरकार के कपड़ा मंत्रालय की एक पहल है.“इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड टेक्नोलॉजी सपोर्ट” योजना का उद्देश्य हस्तशिल्प कारीगरों, हथकरघा बुनकरों को सीधे विपणन की सुविधा प्रदान करने के लिए बड़े कस्बों, महानगरों में स्थायी विपणन बुनियादी ढांचा स्थापित करना है. इस योजना को राज्य हस्तशिल्प, हथकरघा विकास निगम,पर्यटन विकास निगम, शहरी स्थानीय निकायों के माध्यम से पर्याप्त वित्तीय संसाधनों और संगठनात्मक क्षमता के साथ कार्यान्वित किया जाता है. अर्बन हाट के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है. इससे स्थानीय कारीगरों और युवाओं को रोजगार के अवसर मिलते हैं.

सुगियाडीह में दो एकड़ देखी गई थी जमीन

धनबाद के पूर्व मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल ने अपने पद पर रहते हुए चार साल पहले अर्बन हाट के लि‍ए सुगियाडीह में दो एकड़ जमीन चिन्हित की थी. 25 करोड़ की लागत से इस हाट का निर्माण कराया जाना था. मास एंड व्याइस कंसल्टेंट कंपनी को डीपीआर का काम दिया गया था. कुछ दिनों बाद डीपीआर फाइनल होने के दावे भी किये गए थे. लेकिन कुछ महीने बाद इस योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया. अब तो कोई इस विषय पर चर्चा ही नहीं करना चाहता कि योजना क्यों बंद हुई.

निगम की उदासीनता के कारण लटकी योजना

निगम के आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि धनबाद सीओ प्रशांत लायक अर्बन हाट के लिये जमीन उपलब्ध कराने की बात कई बार कह चुके है, लेकिन अभी तक वरीय अधिकारियों ने डिमांड नोट ही नहीं भेजा है. इस कारण इस योजना का काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है.

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