विधानसभा घेराव में शामिल होने मनरेगाकर्मी रांची रवाना

चांडिल। झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ के आह्वान पर सोमवार को सरायकेला-खरसावां जिला के मनरेगाकर्मी रांची रवाना हुए. संघ ने सोमवार को अपनी मांगों के समर्थन में विधानसभा घेराव करने का निर्णय लिया है. सरायकेला-खरसावां जिला मनरेगाकर्मी संघ के अध्यक्ष शंकर सतपति ने बताया कि वे सरकार की महत्वाकांक्षी योजना महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम अंतर्गत ग्राम रोजगार सेवक, लेखा सहायक, कंप्यूटर सहायक, कनीय अभियंता, सहायक अभियंता व प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी के पद पर वर्ष 2007 से निष्ठापूर्वक काम कर रहे हैं. उनकी नियुक्ति सरकारी प्रयोजन एवं पूर्ण वैधानिक प्रक्रिया से आरक्षण रोस्टर का पालन कर मेधासूची के आधार पर हुई है.

15 वर्षों बाद अब अपने भविष्य की चिंता सताने लगी : शंकर सतपति

उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने जीवन काल का अति महत्वपूर्ण समय मनरेगा एक्ट के क्रियान्वयन तथा गरीब जनता को सरकार के दिशा-निर्देश के अनुसार रोजगार देने में बिता दिया. लेकिन 15 वर्षों बाद अब जीवन का ऐसा मोड़ आ गया है कि नौकरी के अतिरिक्त पारिवारिक जिम्मेदारियों, बुजुर्ग माता-पिता, बच्चे तथा अपने भविष्य की चिंता सताने लगी है. क्योंकि 15 वर्षों बाद भी मनरेगा कर्मियों को न तो नियमित वेतनमान मिला है न ही स्थायी पद दिया गया है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने चुनाव के पूर्व मनरेगा कर्मियों की सेवा स्थायी करने और वेतनमान देने का वादा किया था. लेकिन सरकार बनने के इतने दिनों के बाद भी सरकार मनरेगाकर्मियों के हित में किसी प्रकार की कोई पहल नहीं कर रही है.

विधानसभा घेराव के बाद घेरा डालो डेरा डालो आंदोलन

संघ के जिलाध्यक्ष शंकर सतपति ने बताया कि एक दिवसीय विधानसभा घेराव कार्यक्रम के बाद मनरेगाकर्मी राज्यस्तरीय संघ के आह्वान पर ‘घेरा डालो-डेरा डालो’ आंदोलन में शामिल होंगे. आठ अगस्त को अगस्त क्रांति के मौके पर मनरेगाकर्मी झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ के बैनर तले राज्य के ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री के आवास पर ‘घेरा डालो-डेरा डालों’ अभियान की शुरूआत की जाएगी. इसके साथ ही संघ के मांगों की पूर्ति होने तक चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा.

27 जुलाई 2020 से 10 सितंबर 2020 तक किया गया था हड़ताल

विदित हो कि झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ ने अपनी मांगों के समर्थन में 27 जुलाई 2020 से 10 सितंबर 2020 तक हड़ताल किया था. इस दौरान तीन चक्र के वार्ता में मनरेगा कर्मियों के अधिकांश मांगों को उचित ठहराते हुए डेढ़ महीने के अंदर पूरा करने का आश्वासन दिया गया था. समझौते के आधार पर हड़ताल समाप्त कर राज्य भर के मनरेगा कर्मी अपने कर्तव्य पर लौट गए किंतु सरकार ने जितनी तत्परता हड़ताल समाप्त कराने के लिए दिखाई थी उतनी तत्परता समझौता में तय मांगों को पूरा करने के लिए नहीं दिखा रही है. हड़ताल समाप्त होने के लंबे अरसे के बाद राज्य भर के मनरेगा कर्मचारी स्वयं को ठगे हुए महसूस कर रहे हैं. साथ ही निराशा और बगावत के सुर भी बुलंद होने लगी है. जो अब आंदोलन का रूप ले रहा है.

मांगे पूरी करने का आग्रह

वहीं, मनरेगा कर्मियों ने संघ की लंबित मांगों को पूरा करने का आग्रह किया है. उनकी मांगों में पंचायत सचिव के रूप में सभी मनरेगाकर्मियों काे समायोजित करें या 50 प्रतिशत आरक्षण दें. साथ ही समान काम का समान वेतन देने, वर्ष 2020 के अनिश्चितकालीन हड़ताल में दौरान बरखास्त किए गए राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिरुद्ध पांडेय और धनबाद जिला अध्यक्ष श्रीराम को पुनः सेवा बहाल करने, सेवा शर्त नियमावली में संशोधन करने, मनरेगाकर्मियों को स्थायी करने, स्थायी किए जाने की तिथि तक पद एवं कोटि के अनुरूप वेतनमान देने, सामाजिक सुरक्षा का लाभ देने समेत अन्य मांगे शामिल हैं. विधानसभा घेराव में शामिल होने के लिए जिलाध्यक्ष के नेतृत्व में मनसा राम उरांव, चित्तरंजन माझी, उमेश उरांव, विद्याधर कुमार, रुपम कुमार गुप्ता, मुरली मोहन हेम्ब्रम, गुरुपद महतो, अनील मुर्मू, होलीका देवी, कार्तिक माझी समेत कई मनरेगाकर्मी शामिल थे.

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