स्वरोजगार से जुड़ी ग्रामीण महिलाएं, कर रही हैं हर क्षेत्र में सहयोग

धनबाद। झारखंड राज्य आजीविका संवर्द्धन समाज (जेएसएलपीएस) से जुड़कर धनबाद जिले के ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं. यह कार्य राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन का एक हिस्सा है, जो पूरे देश में अलग अलग नाम से संचालित किया जा रहा है. यह जानकारी जेएसएलपीएस की डीपीओ रीता सिंह ने दी. उन्होंने बताया कि सरकारी कार्यों में सहयोग करने के साथ अलग अलग उत्पाद का निर्माण कर महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं.

साढे 9 हजार स्वयं सहायता समूह का हुआ गठन

डीपीओ ने बताया कि धनबाद जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में अब तक 9 हजार 500 महिला स्वयं सहायता समूह का गठन किया जा चुका है. प्रत्येक समूह में 10 से 12 महिलाएं शामिल रहती हैं. 700 ग्राम संगठन का निर्माण किया गया है. 43 कलस्टर फेडरेशन ग्रुप का गठन हुआ है. प्रत्येक समूह को रोजगार शुरू करने के लिये 50 हजार तक सहायता राशि दी जाती है. पहले 25 हजार तक ही मिलती थी, लेकिन अब केंद्र सरकार ने राशि बढ़ा दी है.

6 हजार समूह को बैंक से मिल चुका है ऋण

डीपीओ ने बताया कि रोजागर के लिए जेएसपीएलएस, प्रत्येक समूह को बैंक से लोन दिलाने का काम भी करता है. अब तक जिले में 6 हजार समूह को ऋण मिल चुका है. कार्य के अनुसार बैंकों द्वारा 1 लाख रुपये ऋण समूह को दिया जाता है. जो महिलाएं एकल रोजगार शुरू करना चाहती हैं, उन्हें मुद्रा ऋण उपलब्ध कराया जाता है.

  इन सरकारी योजनाओं में मिल रहा है रोजगार

रीता सिंह ने बताया कि समूह की महिलाएं रोजगार से जुड़ने के साथ समाज में जागरुकता लाने का भी काम करती हैं. कोरोना काल में जब लोगों के बीच वैक्सीन को लेकर कई सारे भ्रम थे, तब समूह की महिलाओं ने उन्हें जागरूक कर वैक्सीन सेंटर में पहुंचाने का काम किया था.

  आंगनबाड़ी से ग्रामीण विकास तक

आज के संदर्भ में बात करें तो समूह की महिलाएं आंगनबाड़ी में पोषाहार तैयार करने से लेकर ग्रामीण विकास से जुड़े कार्यों में अपना योगदान दे रही हैं. मुर्गी, सुअर, बकरी एवं गाय पालन का भी काम कर रही हैं. वर्तमान में 600 ऐसे एक्टिव ग्रुप हैं, जो बेहतर काम कर रहे हैं.

  जोहार कार्यक्रम का उठा रही हैं लाभ

जेएसपीएलएस के माध्यम से धनबाद सहित अन्य जिलों में जोहार कार्यक्रम चलाया जा रहा है,जिसमें कुआं निर्माण, लेजर आधारित पंप का निर्माण, मछली पालन आदि का काम भी शुरू किया गया है. सब्जी उत्पादन में भी बढ़ोतरी लाने के लिए समूह को प्रशिक्षण दिया जा रहा है. इन सभी कार्यों की लगातार मॉनिटरिंग होती है. समूह के उत्पाद को मार्केट उपलब्ध कराने के लिये पलास मार्ट भी खोला जा रहा है.  इस मार्ट में समूह द्वारा निर्मित उत्पादों की बिक्री होती है. लोग इन उत्पादों को काफी पसंद कर रहे हैं.

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