बारिश होते ही खेतों में दौड़े किसान, धान रोपनी में लगी महिलाएं

पाकुड़। बादलों की कंजूसी झेल रहे ज़िले के किसानों ने 31 जुलाई को थोड़ी राहत महसूस की. चार घंटे की बारिश के बाद खेतों में पानी ठहरा और किसान बिना समय गंवाए सारा कामकाज़ छोड़कर खेतों की ओर धान रोपनी करने निकल गये. अगले दिन 1 अगस्त को ज़िले के विभिन्न हिस्सों में ऐसी ही तस्वीर नज़र आई. सदर प्रखंड के शहर कोल पंचायत के शहर कोल गांव में ट्रैक्टर और हल लेकर किसान खेतों की जुताई करते दिखे. वहीं महिला मजदूरो बीज को उखाड़ कर खेतों में बुवाई करती दिखीं.

किसानों ने कहा कि बारिश हुई है और हम लोग खेत में आ गए हैं. लेकिन अब खेती का उपयुक्त समय निकल चुका है. धान की पैदावार बहुत कम होगी. अभी भी सुखाड़ की स्थिति बनी हुई. लगभग 90 प्रतिशत से अधिक धान का बीज धूप के कारण जल चुका हैं. भाद्रपद माह में धान की फसल अच्छी नहीं हो पाती है. फसल को कीट पतंगों का खतरा बढ़ जाता है. किसानों ने कहा कि सरकार को पाकुड़ जिले को सुखाड़ क्षेत्र घोषित कर किसानों को उचित मुआवजा मुहैया कराना चाहिए. बैंको के कृषि लोन या इस साल के ब्याज को माफ़ करने की ज़रूरत किसानों ने बताई.

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