प्राइवेट प्रैक्टिस पर लगी रोक, चिकित्सक हो रहे गोलबंद

रामगढ़। गरीबों का इलाज सरकारी अस्पतालों में समय पर हो इसके लिए अस्पतालों में चिकित्सकों के साथ सारे संसाधन उपलब्ध कराए गये हैं. इसके बाद भी कई बार मरीजों को इलाज में परेशानी होती है. इसकी वजह चिकित्सकों की ड्यूटी पर उपलब्ध नहीं होना है. इसे लेकर सरकार ने प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक लगा दी है. इस पर चिकित्सकों में नाराजगी है. इसे जानने लगातार मीडिया की टीम ने चिकित्सकों से बात की और उनके विचार लिए.

सरकार का आदेश डॉक्टरों के लिए प्रताड़ना के समान : डॉ मृत्युंजय कुमार

झासा के राज्य समन्वयक व आईएमए के रामगढ़ जिला उपाध्यक्ष डॉ मृत्युंजय कुमार ने कहा कि 17 जून 2016 को विद्यासागर के एक आदेश को निकाल कर चिकित्सकों पर पाबंदी लगाने का प्रयास किया जा रहा था. जिस पर झारखंड राज्य स्वास्थ्य संगठन (झासा) और आईएमए द्वारा विरोध करने पर वह आदेश उस समय रुक गया था. सरकार ने फिर से यह आदेश निकालकर चिकित्सकों को प्रताड़ित करने का काम कर रही है. इस नए आदेश पर एक चिकित्सक को एक डिक्लेरेशन लिखकर देना होगा कि वह चिकित्सक किसी भी प्राइवेट अस्पताल से अटैच नहीं है. सरकारी आदेश के अनुसार उस चिकित्सक को क्लीनिक चलाने का आदेश तो है, लेकिन सिर्फ ओपीडी चलाने का आदेश है. यानी एक हड्डी का डॉक्टर मरीज को फ्रैक्चर तो बता सकता है, लेकिन उसका इलाज नहीं कर सकता. एक सर्जन जले हुए मरीज को देख सकता है, लेकिन उसको भर्ती नहीं कर सकता है.

चिकित्सक ने कहा कि सरकारी आदेश के अनुसार वह डॉक्टर अपने कार्य को लेकर बंधा रहेगा. सरकार के इस आदेश के बाद चिकित्सकों का फ्रीडम नहीं रहेगा. झासा संगठन ने सरकार से यह सवाल किया है कि झारखंड के अलावा क्या किसी अन्य दूसरे राज्यों में प्राइवेट और सरकारी चिकित्सकों पर अंकुश लगाने का प्रयास किया गया है क्या? सरकार द्वारा निकाले गए इस आदेश के बाद चिकित्सक सरकारी नियम में बंध जाएगा और जरूरतमंद मरीजों का भी इलाज नहीं कर पाएगा. इसलिए सरकार का यह आदेश व्यावहारिक और जनविरोधी है. इससे सिर्फ आम जनता को परेशानी होगी. सरकार इस आदेश को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए और चिकित्सकों को पूरी स्वतंत्रता दे.

डॉक्टरों को टैलेंट दिखाने से रोका जा रहा : डॉ महालक्ष्मी

आईएमए की रामगढ़ महिला विंग की अध्यक्ष डॉक्टर महालक्ष्मी ने कहा है कि 2016 में ही एक आदेश निकलने के बाद चिकित्सकों ने काफी विरोध किया था. विरोध को देखते हुए सरकार ने उस आदेश को लागू नहीं किया था. फिर से उसी आदेश को निकाल कर चिकित्सकों की आजादी को सरकार छीनने का प्रयास कर रही है. सरकारी आदेश के अनुसार शहरी क्षेत्र में सरकारी अस्पताल से पांच सौ मीटर और ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी अस्पताल से ढाई सौ मीटर की दूरी पर कोई भी सरकारी चिकित्सक प्रैक्टिस नहीं कर सकता.

डॉक्टर महालक्ष्मी ने कहा कि मैं एक लेडी डॉक्टर हूं. मेरे पास अगर कोई डिलीवरी पेसेंट आती है तो क्या मैं उसका इलाज नहीं करूं. मौजूदा समय में सरकार एनपीए नहीं दे रही है तो चिकित्सक प्रैक्टिस तो करेंगे ही. डॉक्टरों के पास टैलेंट होता है उनको अपना टैलेंट दिखाने से क्यों रोका जा रहा है. सरकारी आदेश से किसी का नुकसान हो ना हो पब्लिक का बहुत नुकसान होने वाला है. इस आदेश के बाद कई नए डॉक्टर रिजाइन दे देंगे. नए-नए डॉक्टर रिजाइन देकर चले जाएंगे. क्योंकि डॉक्टर अपना टैलेंट बर्बाद नहीं करेंगे. सिर्फ बुखार और खांसी से चिकित्सकों को अनुभव नहीं आता है. अलग-अलग जितने ज्यादा मरीजों को डॉक्टर देखते हैं, उनका अनुभव उतना ही ज्यादा बढ़ता चला जाता है. इसलिए सरकार को चाहिए कि चिकित्सकों की पाबंदी पर निकाले गए इस आदेश को वापस लेने के बारे में सोचे.

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